गलियारे के रास्ते जाने वाले यात्रियों से अधिक संख्या में गुरुद्वारा पहुंच रहे पाकिस्तान के मुसलमान


अमृतसर, 20 नवम्बर (सुरिन्द्र कोछड़) : धार्मिक पर्यटन को उत्साहित करने के लिए पाकिस्तान सरकार द्वारा वहां के आम मुस्लिम नागरिकों को गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब करतारपुर साहिब में जाने की मंजूरी के बाद गलियारा के रास्ते जाने वाले भारतीय नागरिकों की तुलना में सुरीदके-नारौवाल सड़क के रासते गुरुद्वारा साहिब के दर्शनों के लिए जाने वाले पाकिस्तान के मुस्लिम नागरिकों की संख्या बढ़ गई है। भारत व पाकिस्तान के बीच पिछले 9 नवम्बर को रस्मी तौर पर खोले गए करतारपुर गलियार के रास्ते गुरुद्वारा श्री करतारपुर जाने के लिए भारतीय संगत में भारी उत्साह होने के बावजूद पासपोर्ट की शर्त, 20 डालर की फीस, आन-लाईन रजिस्ट्रेशन व रोजाना तकनीकी कारणों के कारण भारतीय संगत तय संख्या अनुसार पाकिस्तान नहीं पहुंच रही है। इस के अलावा यात्रा पर जाने के इच्छुक नौजवानों में इस को ले कर भी असमंजस बना हुआ है कि पाकिस्तान जाने पर उनके पासपोर्ट में यात्रा बारे जानकारी दर्ज होगी या नहीं। गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए जाने के इच्छुक कई लड़के-लड़कियों के साथ ‘अजीत समाचार’ ने इस बारे में बातचीत की। उन्होंने बताया कि वह इस बार तो पाकिस्तान नहीं जा रहे है, क्योंकि अगर उनके पासपोर्ट पर पहली एंट्री पाकिस्तान की हो गई तो उनको किसी और देश में जाने के लिए वीजा नहीं मिलेगा, या इसके चलते भारी परेशानी आ सकती है।वहीं पाकिस्तान के इस्लामाबाद, लाहौर, कराची, फैसलाबाद, गुजरांवाला व इस्लामकोर्ट सहित बहुत सारे शहरों से रोज़ाना सैंकड़ों की गिनती में पाकिस्तानी मुस्लिम परिवार गुरुद्वारा परिसर में पहुंच रहे हैं। गुरुद्वारा साहिब जाने के लिए पाकिस्तान के हिन्दू व सिखों के अलावा बाकी सब धर्मों के लोगों से 200 रुपए फीस ली जा रही है। टिकट खरीदने के बाद श्रद्धालुओं को बस द्वारा काम्पलैक्स में ले जाया जा रहा है जहां दाखिल होने से पहले उनके शिनाख्ती कार्ड स्कैन करने के उपरांत उनको गले में डालने वाला एक कार्ड दिया जा रहा है। गुरुद्वारा साहिब के दर्शनों के लिए जाने वाले पािकस्तानी मुस्लिम नागरिकों में पुरुष, औरतें, बच्चे व विदेशी शामिल हैं।
श्रद्धालुओं को वापसी समय तोहफा देने से पीछे हटा पाकिस्तान
 करतारपुर गलियारे के प्रबंधों की जिम्मेवारी संभालने वाली फंरटीयर वकर्ज आग्रेनाइजेशन (एफडब्ल्यूओ) ने गलियारा खोलने से पहले सार्वजनिक तौर पर वायदा किया था कि 20 डालर की फीस की अदायगी करके पाकिस्तान आने वाले श्रद्धालुओं को श्री करतारपुर साहिब से भारत वापसी के समय पाकिस्तान सरकार द्वारा एक यादगारी तोहफा दिया जाएगा। जिस की कीमत 800 रुपए के करीब बताई गई थी व यह भी बताया गया था कि तोहफे वाले खूबसूरत डिब्बे में संगत को कंघा, कड़ा, पिनी प्रशाद, कप व एक फोटो भेंट की जाएगी। जबकि भारतीय संगत की गिनती में भारी कमी के चलते पाकिस्तान ने अब यह भरोसा देने से फिलहाल पीछे हट गया है।