" हैदराबाद का घटनाक्रम " न्यायिक व्यवस्था पर उठे सवाल


हैदराबाद में 27 नवम्बर की रात को 4 बस ड्राइवरों द्वारा एक पेट्रोल पम्प पर खड़ी एक वैटर्नरी डाक्टर लड़की का अपहरण करने, उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने और बाद में उसको आग लगाकर जलाने की बेहद दुखद घटना ने देश भर में दुष्कर्मियों के विरुद्ध एक गुस्से की लहर पैदा कर दी थी। लोग सड़कों पर उतर आए। दोषियों को तत्काल फांसी दिए जाने की मांग की जाने लगी थी। संसद के चलते सत्र में भी सभी प्रवक्ताओं ने अपना रोष प्रकट किया था। जया बच्चन ने तो यहां तक भी कह दिया था कि ऐसे दोषियों को लोगों के हवाले कर देना चाहिए और पीट-पीट कर मारना चाहिए। देश भर में उठे इस गुस्से के तूफान की समझ आती है। इस कारण कि आज स्थान-स्थान पर छोटी बच्चियों से लेकर बड़ी महिलाओं के साथ ऐसे घिनौने कृत्य किए जाने के समाचार आते हैं। यह सभी समाचार बुरी तरह हिला देने वाले होते हैं। हैदराबाद की इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले में एक बार फिर दिल को दहला देने वाली और रौंगटे खड़े करने वाली एक और घटना घटी है। गत वर्ष दिसम्बर, 2018 में एक लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया परन्तु उसकी कुछ महीने तक सुनवाई नहीं हुई। बहुत ही प्रयासों के बाद इस संबंध में मार्च 2019 को पुलिस द्वारा रिपोर्ट लिखी गई थी, इसलिए पांच दोषियों को नज़रबंद किया गया था। यह लड़की अब इसी केस के संबंध में तारीख भुगतने जा रही थी। इसके कुछ दिन पहले ही दुष्कर्म के दोषियों शुभम और शिवम को ज़मानत पर रिहा किया गया था। यह दोनों अपने तीन अन्य साथियों के साथ उस लड़की को जबरदस्ती घसीट कर गांव के निकट के खेतों में ले गए। पहले उसको डंडों और रॉडों से पीटा गया, फिर उस पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी गई। आग से जलती हुई वह लड़की भागती हुई सहायता की पुकार करती हुई एक किलोमीटर तक गई और उसने पुलिस को सूचना भी स्वयं ही दी। बाद में बुरी तरह नब्बे प्रतिशत जली इस लड़की को दिल्ली के एक अस्पताल में दाखिल करवाया गया जहां उसकी हालत बेहद गम्भीर है। इससे पहले वर्ष 2017 में इसी ज़िले में एक अन्य दर्दनाक घटना घटी थी, जिसमें भाजपा के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर तथा उसके साथियों ने एक लड़की के साथ दुष्कर्म किया था। लाख प्रयासों के बावजूद इसके बारे में पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया था। बाद में लड़की के पिता को एक झूठे केस में फंसाकर पुलिस द्वारा उसकी मारपीट की गई, जिस कारण उसकी मौत हो गई। इस पर लोगों के फूटे लावे के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यह मामला जांच के लिए सी.बी.आई. को सौंप दिया था। उसके बाद ही इसी वर्ष जुलाई में सेंगर को गिरफ्तार किया गया। 
बात यहीं समाप्त नहीं हुई। बाद में जब यह लड़की अदालत में तारीख भुगतने जा रही थी तो उसकी कार को टक्कर मारकर हादसा करवा दिया गया, जिसमें उसकी दो रिश्तेदार मारी गई। लड़की और उसका वकील गम्भीर हालत में अस्पताल में दाखिल करवाये गये। लड़की की हालत आज तक भी गम्भीर बनी हुई है। लगातार ऐसी दर्दनाक घटनाओं ने लोगों का संयम खत्म कर दिया है, उनको दिसम्बर, 2012 में दिल्ली में हुई ऐसी ही दर्दनाक घटना की याद दिला दी है, जिसमें दिल्ली में डाक्टरी की पढ़ाई कर रही एक लड़की के साथ चलती बस में उसके मित्र के सामने दुष्कर्म किया गया था और फिर उसको चलती बस से बाहर फैंक दिया गया था, बाद में उसकी मौत हो गई थी। सात वर्ष पूर्व हुई इस घटना ने एक बार तो देश की आत्मा को झिंझोड़ कर रख दिया था। मजबूर हुई केन्द्र सरकार ने दुष्कर्म की हो रही घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए जस्टिस वर्मा आयोग बनाया था, जिसकी सिफारिशों से इस संबंध में कानूनों को और भी कड़ा किया गया था, परन्तु इसके बाद भी इन घटनाओं में कोई कमी नहीं आई। वर्ष 2017 की रिपोर्ट के अनुसार देश में गत वर्ष की तुलना में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में 6 प्रतिशत वृद्धि हुई है। इस वर्ष 32,559 दुष्कर्म के मामलों में 1/3 नाबालिग बच्चियां थीं। लगातार ऐसे घटनाक्रम से जनमानस का गुस्सा बेहद बढ़ गया है। इसके साथ उनको यह भी गिला है कि कड़े कानून बनाये जाने के बाद भी सात वर्ष पूर्व दिल्ली में हुए निर्भया केस के दोषियों को अब तक सज़ा नहीं दी जा सकी, न ही कुछ पूर्व जम्मू के कठुआ में एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के दोषियों को भी फास्ट ट्रैक अदालतों में ले जाकर भी आज तक सज़ा नहीं दी जा सकी। पैदा हुए इस रोष के माहौल में हैदराबाद पुलिस द्वारा पीड़िता वैटर्नरी डाक्टर को जलाने के चारों दोषियों की यदि पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने का समाचार आया है, तो उसको अधिकतर लोगों ने अच्छा ही समझा है और उस पर खुशियां मनाई हैं। नि:संदेह पैदा हुई ऐसी भावना से देश की प्रशासनिक व्यवस्था, पुलिस और न्यायपालिका पर भी प्रश्नचिन्ह लगता है। ऐसे खौफनाक केसों में न्याय देने की ढीली रफ्तार ने लोगों के रोष को और भी बढ़ाया है। ऐसी स्थिति में अब इस बात की और भी कड़ी आवश्यकता महसूस होने लगी है कि ऐसे भयानक केसों में न्यायपालिका एक सीमित और निश्चित समय में अपने फैसले सुनाए। हम कानून के शासन के समर्थक हैं। किसी भी स्थिति में पुलिस को कानून से बाहर जाकर ऐसी कार्रवाइयां करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस पुलिस मुठभेड़ के पक्ष और विरोध में कई तरह के बयान आए हैं। अधिकतर लोगों ने हालात को देखते हुए इसके पक्ष में बयान दिए हैं, परन्तु इस संबंध में हम महिलाओं के मामलों के बारे में आयोग की प्रमुख रेखा शर्मा के बयान के प्रति अपना समर्थन रखते हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि महिलाओं के अधिकारों के लिए बनी यह संस्था दोषियों को मौत की सज़ा दिलाने के पक्ष में थी, परन्तु ऐसा कुछ सही न्यायिक प्रणाली के द्वारा ही किया जाना चाहिए था। देश के कानूनों और न्यायिक व्यवस्था को इस तरह प्रभावी बनाये जाने की आवश्यकता महसूस होती है कि बड़े अपराधियों को न्याय-संगत ढंग से निश्चित समय में कठोर सज़ाएं दी जा सकें।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द