गुस्से वाला बंटी
बाल कहानी
जाड़े की सुबह बंटी बंदर पेड़ की एक डाल पर बैठा ठंड से थर-थर कांप रहा था। उसे कांपते देखकर अपने घर में बैठा कालू कौआ हंस पड़ा। कालू कौआ की हंसी सुनकर बंटी बंदर बोल पड़़ा कौन है रे जो हमें देखकर हंस रहा है। हंसना है तो बाहर आकर हंस! मेरा गुस्सा नहीं है तुमने।
कालू कौआ घर से बाहर आकर एक बार फिर हंस कर बोला, तुम इतने बड़े बंदर होकर अपने लिए एक घर नहीं बना सकते हो। इस जाड़े में ठंड से कांप रहे हो। तुम्हें देखकर तो सारे पशु-पक्षी हंसेंगे ही। मेरी मानो तो झटपट अपने लिए एक घर बना लो। ताकि जाड़े में कांपना न पड़े। कालू तू मुझे समझाने आया है। देख अभी तेरा घर उजाड़ कर हम पर हंसने और समझाने का मजा चखाता हूं।
इतना कहकर बंटी बंदर तेजी से दौड़कर कालू कौआ के घर की ओर चल पड़ा। कालू कौआ का घर पेड़ की सबसे ऊंची और पतली डाल पर था। बंटी के वहां पहुंचते ही वह डाल टूट पड़ी और बंटी डाल सहित जमीन पर आ गिरा। उसके हाथ-पैर टूट गए। वह दर्द से व्याकुल होकर बचाओ-बचाओ चिल्लाने लगा।
बंटी बंदर को जमीन पर गिरा देखकर पेड़ पर रहने वाले सारे पक्षी तोता, कठफोड़वा, बगुला, मैना, नीलकंठ, उल्लू, कोयल, तिलहट सभी ताली पीट-पीट कर हंसने लगे।
कालू कौआ बंटी बंदर की हंसी उड़ाते हुए बोला और उजाड़ोगे मेरा घर। इस वन में तुम्हें कोई बचाने नहीं आएगा। इतना कहकर कालू खामोश हो गया।
अपनी बिगड़ी दशा देखकर बंटी बंदर बोला-कालू मैं तुम्हारे पांव पड़ता हूं मुझे बचा लो। मैं कसम खाकर कहता हूं आज के बाद कभी किसी पक्षी पर गुस्सा नहीं उतारुंगा। न किसी पक्षी का घर उजाडूंगा। अब तो हम पर दया करो। मुझे बचा लो।
कालू कौआ उड़कर वन में घूम रहे सोनू हाथी के पास पहुंच कर उससे सारी परेशानियां कह सुनाई।
सोनू बोला-‘कालू बंटी को बचाना मेरा फर्ज बनता है। चलो जल्दी से लेकर उसे डॉक्टर टन-टन भालू के क्लीनिक में चलते हैं।
सोनू हाथी बंटी बंटी बंदर को सूंड़ में उठाकर तेजी से दौड़ता हुआ डॉक्टर भालू के क्लीनिक में जा पहुंचा। और डॉक्टर टनटन भालू से सारी बात बताकर बोला-‘डॉक्टर साहब, बंटी को आप बचा लीजिए। मैं दवा-दारु का सारा खर्चा देने को तैयार हूं।
एक्स रे के बाद बंटी के टूटे हाथ पैर पर डॉक्टर टनटन भालू ने प्लास्टर चढ़ाकर बोला अब आप इसे घर ले जा सकते हैं। तीस दिन के बाद प्लास्टर कटवाने एक बार फिर यहां आना पड़ेगा। दवा भी हमने एक महीने की दे दी है।
सोनू हाथी बंटी को अपने घर में रहने की जगह देकर उसकी देखभाल की जिम्मेदारी अपने सर पर ले ली। तथा सभी पक्षियों ने बंटी के भोजन की जिम्मेदारी अपने सर पर ले ली।
एक महीने के बाद बंटी एकदम ठीक हो गया और उसका सारा गुस्सा न जाने कहां चला गया। वह सभी पक्षियों के साथ मिल-जुल कर रहने लगा और एक-दूसरे के सुख-दु:ख में हाथ बंटाने लगा। वहीं उसने भी अपने लिए एक घर बनाकर उसमें रहने लगा। (सुमन सागर)



