मिलावटी दूध ने ली चार लोगों की जान

आंध्र प्रदेश में मिलावटी दूध पीने से चार लोगों की मृत्यु होने की घटना ने देश भर में एकबारगी बड़ी चिन्ता और हैरानी पैदा की है। यह सनसनीपूर्ण घटना एक दिन अर्थात 48 घंटों के दौरान दो बार हुई जिसका अभिप्राय यह निकलता है कि मिलावटखोरी की यह क्रिया अनवरत और निरन्तर जारी थी। इस घटना से यह भी पता चलता है कि इस दूध में या तो कोई ऐसा मिलावटी तत्व मिला होगा जिससे यह दूध विषाक्त हो गया, अथवा इसमें जिस पानी को मिलाया गया, उसमें अवश्य कोई विषाक्त वस्तु मिली होगी। वैसे भी, दूध का अप्राकृतिक निर्माण करते समय उसमें जो तत्व और पदार्थ प्रयुक्त किये जाते हैं, उनमेें कास्टिक सोडा और कई तरह के कैमिकल डाले गये होते हैं जिनमें विष की मात्रा मौजूद रहती है। इस दूध को पीने से एक दर्जन से अधिक लोग गम्भीर रूप से अस्वस्थ भी हुए हैं, अत: पता चलता है कि इस विषाक्त दूध की सप्लाई वहां बड़े स्तर पर हुई होगी।
प्रदेश सरकार ने इस घटना पर तत्काल प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दूध-विक्रेता को गिरफ्तार कर लिया है। प्रभावित मृतक लोगों के परिवार के लिए 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि जारी करने का आदेश भी दिया गया है, किन्तु इस घटना ने प्रदेश के बाहर अन्य कई राज्यों के लिए भी एक बड़ा संदेश दिया है। 
दूध एक ऐसा पदार्थ है जिसका सेवन देश के सभी राज्यों के प्राय: सभी परिवारों में किया जाता है। रोगियों, बच्चों और महिलाओं के लिए यह अत्यावश्यक तत्व के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। पुरातन समय से दूध मनुष्य मात्र के लिए प्राण-दायी पदार्थ माना जाता रहा है, लेकिन यह एक ऐसा पदार्थ भी है जिसमें मिलावट की शिकायत आम तौर पर की जाती है। यह मिलावट पशु-वंश से उपलब्ध दूध में पानी अथवा नकली और कृत्रिम दूध को मिलाकर की जाती है। नकली दूध कृत्रिम और हानिकर तत्वों के मिश्रण को मिलाकर भी तैयार किया जाता है। इसमें हानिकर कैमिकल और कपड़े धोने वाला कास्टिक सोडा भी मिलाया जाता है जिससे यह दूध बेहद हानिकर हो जाता है। चूंकि यह दूध अत्यन्त दूषित जगहों और प्रदूषित माहौल में तैयार किया जाता है, अत: इसमें हानिकर तत्व अधिक प्रभावी हो जाते हैं।
इस घटना के बाद से प्राप्त विवरणों के अनुसार इस दूध को पीने से कुछ लोगों की किडनी खराब हो गई। कई अन्यों को मूत्र की शिकायत पैदा हुई, और कुछ अन्यों की आंखों की रोशनी भी प्रभावित हुई है। दूध विक्रेता भिन्न-भिन्न परिवारों के मवेशियों से दुहा गया दूध लेकर आता था जहां 40 से अधिक मवेशी थे। बहुत स्वाभाविक है कि दूध में विषाक्त तत्व मिलावट के कारण ही उपजा होगा। मिलाया गया पानी भी विषाक्त हो सकता है अथवा किसी एक पशु के दूध में कोई विषाक्त कीट गिरा होने के कारण भी दूध विषाक्त हो गया प्रतीत होता है।
हम समझते हैं कि मिलावट की यह समस्या देश के किसी एक क्षेत्र अथवा राज्य विशेष की नहीं, अपितु पूरे देश में व्याप्त हो गई है। पंजाब और हरियाणा में भी पिछले दिनों नकली दूध की फैक्टरियों का पता चला था। पंजाब और हरियाणा के सीमांत क्षेत्रों में स्थित कुछ फैक्टरियों में बने ऐसे मिलावटी और नकली दूध से बने खोया और पनीर भी बड़ी मात्रा में बरामद हुए थे। राजस्थान और उत्तर प्रदेश की कई जगहों पर भी ऐसी फैक्टरियां बरामद होने के समाचार मिले हैं। नि:संदेह रूप में मिलावट अथवा नकली दूध बनाना एक घोर आपराधिक और अमानवीय कृत्य है। इस अपराध में संलिप्त लोगों को कठोर कानूनों के तहत लाया जाना चाहिए। दूध मानव के लिए बहुत उपयोगी पदार्थ है। इसमें मिलावट नहीं की जानी चाहिए। कानून के साथ यह एक मानवीय अपराध भी है। व्यापार और कारोबार के अपने कुछ नैतिक मानदण्ड भी होने चाहिएं। सरकारों को दूध में मिलावट रोकने अथवा नकली दूध के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए कानून और नैतिकता पर आधारित प्रत्येक सम्भव कार्रवाई अवश्य करनी चाहिए।

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