प्राकृतिक सौन्दर्य का पर्याय है मॉरीशिस

विगत समय में एक प्रतिनिधिमंडल संग मॉरीशस जाना हुआ। यूं तो इससे पूर्व भी दुनिया के अनेक देशों में जाने का अवसर मिला लेकिन मॉरीशस रवाना होते हुए विदेश नहीं बल्कि अपनों से मिलने की अनुभूति हो रही थी क्योंकि वह भारतवंशियों का देश है। भारतवंशियों ने अपने पुरुषार्थ से न केवल उस धरती को स्वर्ग बनाया बल्कि पर्याप्त यश भी अर्जित किया। 
गंगा सा पवित्रा अपनत्व मॉरीशस की विशेषता है। उस धरती को प्रणाम करने और अपने बन्धुओं की यशोगाथा को बार-बार सुनने के बाद स्वयं अपनी आंखों से देखने, अनुभव करने के इस अवसर पर गौरवान्वित महसूस करते हुए दिल्ली के इन्दिरा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 से प्रात:8 बजे एयर मॉरीशस की फ्लाइट पर सवार हुए।
साढ़े सात घंटे की सुखद यात्रा के बाद पोर्ट लुई के सर शिवसागर रामगुलाम अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पहुंचे। दिल्ली के एयरपोर्ट के मुकाबले काफी छोटा। मात्र कुछ विमान ही वहां खड़े दिखाई दिये। औपचारिकताओं में भी अधिक समय नहीं लगा क्योंकि हर काउंटर पर हमारे ही साथी थे। यहां और भारतीय समय में डेढ़ घंटे का अंतर। 
बाहर निकले तो अनेक मित्रों संग रिमझिम फुहार ने स्वागत किया। हमें होटल ले जाने के लिए वाहन तैयार थे। एयरपोर्ट दक्षिणी छोर पर तो हमारा होटल उत्तर में समुद्र के बिल्कुल पास था। लगभग 40 किमी की दूरी तय करते हुए पहली नज़र में मॉरीशस साफ सुथरा, सड़कें दिखी। गन्ने के देश में चारों ओर हरियाली। होटल में भी पूरी तरह से प्राकृतिक वातावरण। बढ़िया हिंदी बोलते भारतीय मूल के भले लोग। रात्रि में सुन्दर भोजन, घर जैसा अपनापन।
अगली सुबह जल्दी समुद्र की ओर सैर के लिए जाना हुआ। बहुत खुशनुमा मौसम, हल्की सर्दी, तट पर नारियल के घने ऊंचे पेड़, विस्तृत नीले समुद्र में कहीं-कहीं काली पत्थर की चट्टानें आकर्षित कर रही थी। समुद्र तट पर सफेद रेत। कहीं-कहीं शंख सिप्पी भी। दूर से हड्डियों जैसे दिखाने वाले क्रीम रंग के पतले-कमजोर पत्थरों के ढेर भी। वहां से लौटकर स्नान और फिर यज्ञ। होटल में बनी एक विशाल कुटिया में प्रतिदिन यज्ञ की व्यवस्था थी। साढ़े आठ बजे होटल के विशाल डाइनिंग हाल में नाश्ता, फल, ब्रेड-बटर, जैम, दूध, दही के अतिरिक्त राजमा, पूरी भी।  लगभग 10 बजे मुद्रा विनिमय (आश्चर्य कि मॉरीशस रुपये का मूल्य भारतीय रुपये से लगभग दुगना है) मॉरीशस में 25 रुपये का नोट चलन में है तो 200 और 2000 का भी। नये नोट प्लास्टिक के हैं तो पुराने हमारी तरह कागज के ही लेकिन वहां पैसे को सेन्ट कहा जाता है। प्रथम दिवस अनेक समुद्र तटों का अवलोकन। एक स्थान पर अम्बरीश जी ने समुद्र में डूबी रेल की पटरी की ओर ध्यान आकर्षित किया जो ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव था। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, बढ़ती जनसंख्या से बिगड़ते पर्यावरण के कारण केवल मॉरीशस में ही नहीं, हमारे समुद्र तटों को भी खतरा बढ़ रहा है। वहां से हम एक मॉल का अवलोकन करते हुए बोटानिकल गार्डन पहुंचे। द्वार से 200 रूपये का टिकट लेकर विशाल गार्डन में प्रवेश हुआ। अनेक प्रकार के विशाल वृक्ष। कुछ तो सैकड़ों वर्ष पुराने भी। कुछ की जड़ें इतनी विशाल और अजीब आकृतियों वाली कि आंखें फटी रह गई। विशेष बात यह कि इस बाग में एक ऐसा पेड़ है जो साठ से सत्तर साल में एक बार फूलता है और इसका नाम ‘तालीपो’ है। 
भारत से दूरी 5815 किमी है। हिन्द महासागर भारत और मारीशस को जोड़ता है। छोटे चमकदार मोती जैसा  प्राकृतिक सौंदर्य का पर्याय है यह देश है। चारों ओर समुद्र घिरा हुआ। हर तरफ हरियाली ही हरियाली। नारियल के पेड़ों के झुण्ड हैं तो चीड़ के पेड़ भी बहुत हैं। हर समुद्र तट विशेषता लिए हुए। बिल्कुल साफ चमकदार पारदर्शी है समुद्र का पानी, सफेद रेत। मजेदार बात यह है कि यहां न तो कोई जहरीले जीव जन्तु (सांप बिच्छु आदि) हैं और न ही शेर, चीते जैसे हिंसक जीव लेकिन एक बात विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि नारियल पानी का स्वाद हमारे यहां से बिल्कुल कुछ अलग, लगभग फीका सा है। पहली बार ऐसा महसूस हुआ मानो सादा पानी पी रहे हों। (उर्वशी)

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