जंगल बचेगा, तभी भविष्य बचेगा

हर साल 3 मार्च को मनाया जाने वाला विश्व वन्यजीव दिवस केवल कैलेंडर की तारीखभर नहीं है। यह मानव सभ्यता के सामने एक विकट चुनौती है कि यदि हम अब भी नहीं चेते और इन्हें बचाने का कोई पुख्ता कदम नहीं उठाया, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। गौरतलब है कि दुनिया की लगभग 10 लाख वन्यजीव प्रजातियां विलुप्ति के खतरे के घेरे में है। भारत जैसे विविध वन्यजीव प्रजातियों वाले देश में अनेक महत्वपूर्ण जीव प्रजातियां जैसे बाघ, गेंडा, एशियाई शेर और गिद्ध संकट से गुजर रहे हैं। भारत जैव विविधता की दृष्टि से विश्व के उन 17 मेगा डाइवर्स देशों में शामिल है, जहां विभिन्न किस्म के जैव प्रजातियों की भरी पूरी दुनिया है। इसलिए हमारे लिए यह दिन कुछ और भी महत्वपूर्ण हैं।  विश्व वन्यजीव दिवस की आधिकारिक घोषणा 20 दिसम्बर 2023 को हुई थी। यह दिन मनाने के लिए 3 मार्च का ही दिन इसलिए चुना गया, क्योंकि इसी दिन 1973 में ‘कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन इनडेंजर्ड स्पेसिज ऑफ वाइल्ड फाउना एंड फ्लोरा’ (सीआईटीइएस) पर हस्ताक्षर हुए थे। सिटीज का उद्देश्य था वन्यजीवों और वनस्पतियों को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के कारण हो रही अवैध तस्करी और विलुप्ति को रोकना। इस तरह देखें तो 3 मार्च न सिर्फ एक प्रतीकात्मक तारीख है बल्कि वन्यजीव संरक्षण से वैकल्पिक संकल्प का दिन है। 
यह दिवस इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज दुनिया कई गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है। तेजी से घटते जंगल, जंगलों में अवैध शिकार बन रहे वन्यजीव, जलवायु परिवर्तन, बढ़ता मानव और वन्यजीव संघर्ष तथा हर गुजरते दिन के साथ जैव विविधता को हो रहा नुकसान। ये सब वो कारण हैं जिनके चलते वन्यजीव आज इतिहास के किसी भी दौर के मुकाबले ज्यादा महत्वपूर्ण हो गये हैं। वन्यजीव बने रहेंगे तो पर्यावरण संतुलन बना रहेगा। भविष्य की पीढ़ियों के लिए जैव विविधता को बचाना आसान होगा। अगर अब भी इंसान वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील नहीं हुए, तो उनका अवैध व्यापार आने वाली पीढ़ियों के लिए, वन्यजीवों की दुनिया सिर्फ किताबों और फिल्मों तक सीमित कर देगी। अगर अवैध वन्यजीव शिकार नहीं रोके गये तो सतत विकास की अवधारणा भी संकट में पड़ जायेगी। 
इन्हीं सब कारणों के चलते हर साल एक विशेष थीम के तहत विश्व वन्यजीव दिवस मनाया जाता है। हर साल अलग-अलग तय होने वाली इस थीम का उद्देश्य विश्व वन्यजीवों की विविध समस्याओं के विरुद्ध दुनिया का ध्यान खींचना और इन समस्याओं पर गौर करना है। हर साल बदलने वाली थीम का मुख्य उद्देश्य-
* वन्यजीव और पारिस्थितिकी तंत्र को महत्वपूर्ण मानना और उसे हर हाल में बचाये रखने का संकल्प है।
* अलग-अलग थीम के तहत मनाये जाने वाले इस दिवस का एक उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण से जुड़े लोगों की आजीविका पर फोकस करना तथा वन्यजीवों के प्रति दुनिया के युवाओं का ध्यान आकर्षित करना है।
* विश्व वन्यजीवों दिवस मनाये जाने में लगातार बदलने वाली थीम का एक उद्देश्य आज के डिजिटल जीवनशैली और नवाचार के युग में वन्यजीव को संरक्षण देने की भावी और प्रभावी तकनीकों पर जोर देना है।
जहां तक इस दिवस को मनाये जाने के तौर तरीकों का सवाल है, तो इस दिन को दुनिया के कई और महत्वपूर्ण दिवसों की तरह शैक्षणिक कार्यक्रम के रूप में मनाया जाता है। इस दिन स्कूलों, कॉलेजों आदि में छात्रों और शिक्षकों के बीच कई तरह की वाद-विवाद प्रतियोगिताएं, भाषण, निबंध लेखन आदि प्रतियोगिताओं आयोजित की जाती हैं। कई तरह के लोगों को जागरूक करने वाले पोस्टर बनाये जाने की कार्यशालाओं का आयोजन होता है। रैलियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के बीच विचार-विमर्श और जैव-विविधता को संरक्षित रखने की संकल्प लेने जैसे कार्यक्रम होते हैं। सोशल मीडिया कैंपेन, वृक्षा रोपण अभियान, डाक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग, वन्यजीव अभ्यारण्यों में विशेष कार्यक्रम और वन्यजीव संरक्षण पर लेखन प्रतियोगिता और बेविनार आदि का आयोजन किया जाता है। 
भारत में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि हमने दुनिया को प्रोजेक्ट टाइगर जैसा सफल वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम मुहैय्या कराया है और अब प्रोजेक्ट एलिफेंट के साथ भी हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। गेंडा संरक्षण कार्यक्रम जैसी योजनाएं भी वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में मील का पत्थर साबित होंगी। इस तरह भारत के लिए यह दिन केवल औपचारिक दिन विशेष नहीं है बल्कि इसके जरिये हम दुनिया को बताते हैं कि दुनिया को सुरक्षित और संरक्षित बनाये रखने में हम कितनी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। 
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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