हम होली का त्यौहार क्यों मनाते हैं?
‘दीदी, हम रंगों का त्यौहार होली क्यों मनाते हैं?’
‘इसके अनेक कारण हैं- बुराई पर अच्छाई की विजय, बसंत का आगमन, सांस्कृतिक व सामाजिक सौहार्द, राधा व कृष्ण का दैविक प्रेम और रंगों का प्रतीक।’
‘इनमें से एक-एक करके मुझे विस्तार से समझाएं।’
‘प्राचीन समय में एक राजा था, जिसका नाम हिरण्यकश्यप था। उसके भाई को भगवान विष्णु ने मार दिया था, जिसका बदला लेने के लिए उसने घोर तप किया। परिणामस्वरूप उसे असाधरण शक्तियां प्राप्त हो गईं और वह अपने को भगवान समझकर अपनी प्रजा पर दबाव डालने लगा कि वह ईश्वर की जगह उसकी पूजा करे। बहुत से लोग डरकर उसकी पूजा करने लगे, लेकिन उसका ही पुत्र प्रहलाद जो बहुत नेक व अच्छा व्यक्ति था, इस गलत बात से सहमत नहीं था। वह न केवल अपने पिता का विरोध करता था बल्कि भगवान विष्णु की पूजा व भक्ति करता था। हिरण्यकश्यप ने अपने ही पुत्र का वध करने का निर्णय लिया और इस साज़िश में उसने अपनी बहन होलिका को भी शामिल कर लिया, जिसे यह वरदान प्राप्त था कि आग उसे जला नहीं पायेगी। इसलिए योजना यह बनाई गई कि होलिका अपनी गोद में प्रहलाद को लेकर बैठेगी, जिससे वह जलकर राख हो जायेगा लेकिन यह साज़िश नाकाम हो गई। प्रहलाद निरंतर भगवान विष्णु का नाम जप रहे थे, जिन्होंने उसकी मदद की। होलिका जल गई और प्रहलाद बच गया।’ ‘तो यह बुराई पर अच्छाई की विजय हुई। और इसीलिए हम होली पर होलिकादहन करते हैं कि अपनी बुराइयों को जलाकर राख कर दो।’
‘हां। फिर संसार के अधिकतर त्योहारों का संबंध मौसम के बदलने व कृषि से है और होली भी इसका अपवाद नहीं है कि यह जाड़े की समाप्ति का संकेत और फसल काटने की शुरुआत करने का अवसर है जो फागुन की पूर्णिमा (फरवरी-मार्च) पर बसंत में मनायी जाती है।’
‘तो बसंत के आगमन के रूप में भी होली को मनाया जाता है।’
‘हां, साथ ही यह सांस्कृतिक व सामाजिक सौहार्द का भी उत्सव है कि टूटे रिश्तों को पुन: जोड़कर एकजुटता बनायी जाती है।’
‘लेकिन फिर हम होली पर रंग क्यों खेलते हैं?’
‘प्राचीन भारत में बसंतोत्सव मनाया जाता था, जिसमें रंग खेले जाते थे। फिर बसंतोत्सव कृष्ण से जुड़ गया जो मथुरा वृंदावन में गोपियों के साथ रंग खेलते थे। अत: अब होली पर कृष्ण राधा की पूजा होती है।’
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



