रोज़गार का हब बनकर उभरा है स्पोर्ट्स और फिटनेस उद्योग
भारत में खेल और फिटनेस अब केवल शौक या स्वास्थ्य तक नहीं सीमित रह गये। यह अरबों, खरबों डॉलर का उद्योग बन चुके हैं। आईपीएल, प्रो-कबड्डी लीग, आईएसएल और ओलंपिक मिशन, फिटनेस एप, जिम चेन, योग स्टुडियो और कारपोरेट वेलनेस प्रोग्राम ने इन दोनो क्षेत्रों को रोज़गार का एक बड़ा केंद्र बना दिया है। साल 2026 में भारत की फिटनेस इंडस्ट्री लगभग 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की हो चुकी है और अभी भी यह क्षेत्र 15 से 20 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। इसके साथ ही यह क्षेत्र अब डॉक्टर या खिलाड़ी के अलावा भी हजारों नये प्रोफेशनल्स की मांग पैदा कर रहा है।
दरअसल फिटनेस के प्रति बढ़ती जागरूकता का सबसे बड़ा कारण कोविड-19 के बाद लोगों में अपने स्वास्थ्य और खुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता के प्रति जागरूकता बढ़ी है। जिम, योग स्टुडियो और फिटनेस सेंटरों की संख्या में हाल के सालों में तेजी से इजाफा हुआ है। ऑनलाइन फिटनेस कोचिंग और एप्स का भी इस दौरान खूब विस्तार हुआ है। सरकार का भी निवेश विभिन्न खेल लीगों के कारण बढ़ी खेल गतिविधियों में हुआ है। भारत सरकार के खेलों को लेकर कई कार्यक्रम है जैसे- खेलो इंडिया मिशन, ओलंपिक मिशन, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम, जैसे कार्यक्रम खेलों में प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ा रही हैं। हाल के सालों तक हमारे यहां वेलनेस इंडस्ट्री का विस्तार बहुत सीमित था। लेकिन हाल के कुछ सालों में यह क्षेत्र तेजी से विस्तारित हुआ है।
इस क्षेत्र में बहुत तेजी से तकनीकी ने भी जर्बदस्त दखल दिया है। आज फिटर, कट, फिट, हेल्थ, फाइन, जैसे एप्स ऑनलाइन फिटनेस कॅरियर के लिए नये से नये अवसर पैदा किए हैं। वियरेबल डिवाइसेज जैसे स्मार्ट वाच, फिटनेस ट्रेकर आदि के कारण डेटा आधारित फिटनेस ट्रेनिंग की मांग बढ़ी है। इस कारण इन सभी क्षेत्रों में कई कॅरियर उभरकर सामने आए हैं, जो पहले नहीं हुआ करते थे। जैसे फिटनेस ट्रेनर जो विभिन्न जिमों में या व्यक्तिगत स्तर पर ट्रेनिंग देते हैं और ऑनलाइन कोचिंग देने का भी काम करते हैं। हाल के सालों में इनकी भारी मांग पैदा हुई है। दूसरी तरफ स्पोर्ट्स कोच और स्पोर्ट्स न्यूट्रिशिनिस्ट और स्पोर्ट्स फिजियोथैरेपिस्ट, स्ट्रैंथ और कंडीशनिंग कोच, योगा ट्रेनर का स्पोर्ट्स मैनेजर, फिटनेस कंटेंट क्रिएटर जैसे अनेक रोज़गार के विशेषज्ञ उभरकर आये हैं। जहां तक स्पोर्ट्स कोच क्षेत्र की बात है तो क्रिकेट, फुटबॉल, एथलिटिक्स, बेडमिंटन आदि के पेशेवर कोच की भारी मांग है। विभिन्न स्कूलों, स्पोर्ट्स अकादमियों और प्रोफेशनल टीमों के साथ जुड़ने की आकर्षक पैकेज के साथ नौकरियां मिल रही हैं। इसी तरह खिलाड़ियों की डाइट पर ध्यान रखने, उनके लिए उपयुक्त डाइट प्लान बनाने आदि की भी बड़े पैमाने पर नौकरियां सामने आयी हैं। स्पोर्ट्स न्यट्रिशनिस्ट के क्षेत्र में फिटनेस और वेट मैनेजमेंट भी तेजी से तरक्की कर रहे क्षेत्र हैं। जहां तक स्पोर्ट्स फिजियोथैरेपिस्ट की बात है तो ये क्षेत्र भी खूब डिमांड में है। कुल मिलाकर कहने की बात यह है कि भारत के युवाओं के लिए आज अनेक क्षेत्र में नौकरियां हैं। पर सवाल है इस विशेषज्ञ क्षेत्र में एंट्री मिले तो कैसे? स्पोर्ट्स फिजियोथैरेपी बनकर खिलाड़ियों को चोट से बचाना और चोटिल होने पर उन्हें जल्दी से जल्दी सही करना, एक फिटनेस फिजियोथैरेपिस्ट के लिए बहुत ज़रूरी है। सरकारी क्षेत्रों में भी हालांकि इन सभी विशेषज्ञों की मांग बढ़ी है, लेकिन मांग के साथ वेल्यू एडिशन भी इन क्षेत्रों को नई ऊंचाईयों तक ले जा रहा है। सवाल है इनके लिए ज़रूरी योग्यता क्या है? इस सवाल का जवाब है 12वीं के बाद उपलब्ध कोर्स जैसे- बीफीईडी अर्थात बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन, बैचलर इन स्पोर्ट्स साइंस, बैचलर ऑफ एक्सरसाइज साइंस, डिप्लोमा की सुविधा उपलब्ध है। ये 1 से 3 साल के कोर्स कर लेने के बाद 12वीं करने के बाद भी स्पोर्ट्स और योगा के क्षेत्र में शानदार कॅरियर की सुविधा है। हालांकि ग्रेजुएशन के बाद और भी बेहतर कोर्स हैं। जैसे- मास्टर ऑफ फिजिकल एजुकेशन, एमएससी स्पोर्ट्स साइंस, एमएससी इन स्पोर्ट्स न्यूट्रिशियन। ये कोर्स करने के बाद बहुत आसानी से नौकरी मिलती है। जो कोर्स बैचलर के बाद उपलब्ध हैं, वो ग्रेजुएशन और ग्रेजुएशन के बाद भी अच्छे कोर्स के रूप में हैं और इसी तरह इस क्षेत्र में एंट्री मारने के लिए कम से कम पांच ऐसे बड़े सर्टिफिकेशन मौजूद हैं, जहां सस्ते से अपनी स्पोर्ट्स पर्सनैलिटी को बेहतर बनाया जा सकता है। इसके अलावा इस क्षेत्र में जिन और महत्वपूर्ण योग्यताओं की दरकार होती है, उसमें शारीरिक फिटनेस, खुद फिट होना और सहनशक्ति तथा ऊर्जा की ज़रूरत होती है।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर




