परीक्षा की तैयारी के लिए तनाव नहीं, संतुलन ज़रूरी
बोर्ड परीक्षाएं इन दिनों जारी हैं। सुबह-सुबह परीक्षा केंद्रों के बाहर विद्यार्थियों की भीड़ थी। हाथों में एडमिट कार्ड और चेहरों पर हल्की चिंता, यह दृश्य हर शहर में देखा जा सकता है। घरों में भी माहौल बदल गया है। बातचीत अब प्रश्न-पत्र और अगले विषय की तैयारी बन चुका है।
ऐसे समय में तनाव स्वाभाविक है। परीक्षा के दिनों में मन का घबराना या परिणाम की चिंता होना असामान्य नहीं है। सीमित तनाव हमें सजग रखता है, परन्तु जब यही डर में बदल जाए, तो प्रदर्शन प्रभावित होने लगता है। इसलिए इन दिनों सबसे अधिक ज़रूरी है- मन को संतुलित रखना।
अब जबकि कुछ परीक्षाएं हो चुकी हैं और कुछ शेष हैं, यह समय नए विषय शुरू करने का नहीं, बल्कि शेष विषयों की सुदृढ़ पुनरावृत्ति का है। जो परीक्षा देकर आ चुके हैं, उन्हें पिछले पेपर को लेकर अधिक चिंता करने के बजाय अगले विषय पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जो हो चुका, उसे बदलना संभव नहीं, जो आने वाला है, वही हमारे नियंत्रण में है।
इन दिनों एक सरल अभ्यास बहुत सहायक हो सकता है। एक क़ागज़ या चार्ट पर बचे हुए विषयों के नाम लिखिए और उनके सामने यह स्पष्ट कीजिए कि किसमें आत्मविश्वास है और किसमें अधिक अभ्यास की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए यदि किसी विद्यार्थी को इतिहास या हिंदी में भरोसा है, तो वह विषय नियमित पुनरावृत्ति से मजबूत रह सकता है लेकिन यदि गणित या विज्ञान को लेकर चिंता है, तो अगले कुछ दिनों में उसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह आत्ममूल्यांकन अनावश्यक भ्रम को कम करता है और तैयारी को दिशा देता है।
परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। दिन को छोटे-छोटे अध्ययन सत्रों में बांटना उपयोगी रहता है। पढ़ाई केवल पढ़ने तक सीमित न रहे। लिख-लिखकर अभ्यास करना विशेष रूप से प्रभावी होता है। जिन विषयों की परीक्षा अभी बाकी है, उनके पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्र हल करना आत्मविश्वास बढ़ाता है और परीक्षा-पैटर्न की समझ को स्पष्ट करता है।
इन दिनों स्वास्थ्य की अनदेखी करना सबसे बड़ी भूल हो सकती है। देर रात तक जागकर पढ़ना कई बार उल्टा असर करता है। पर्याप्त नींद, हल्का व्यायाम या थोड़ी सैर मन को स्थिर रखती है। परीक्षा के दिन शांत मन ही सबसे बड़ी ताकत होता है।
खान-पान में भी संतुलन बनाए रखना चाहिए। हल्का, पौष्टिक भोजन पर्याप्त पानी और फल जैसे केला या भीगे बादाम एकाग्रता बनाए रखने में सहायक होते हैं। अत्यधिक जंक फूड या कैफीन शरीर को थका सकते हैं।
यदि संभव हो, तो रोज़ कुछ मिनट गहरी सांस लेने का अभ्यास या ध्यान अवश्य करें। परीक्षा के दिनों में मानसिक स्थिरता किसी भी अतिरिक्त घंटे की पढ़ाई से अधिक प्रभावशाली सिद्ध हो सकती है।
अभिभावकों की भूमिका भी इन दिनों अत्यंत संवेदनशील होती है। परीक्षा से लौटते ही बच्चों से प्रश्न-पत्र का विश्लेषण करने के बजाये उन्हें कुछ समय आराम करने दें। तुलना और अनावश्यक चर्चा से बचें। इस समय उनका आत्मविश्वास बनाए रखना सबसे बड़ी सहायता है।
अंतत: यह याद रखना आवश्यक है कि परीक्षा जीवन की अंतिम परीक्षा नहीं है। यह केवल एक पड़ाव है। जो विद्यार्थी इन दिनों संतुलन बनाए रखते हैं, वही दीर्घकाल में आगे बढ़ते हैं। सही दृष्टिकोण, शांत मन और नियमित अभ्यास के साथ परीक्षा का सामना किया जाए, तो यह तनाव नहीं, बल्कि आत्मविश्वास का अवसर बन सकती है।
-प्रोफेसर, भौतिकी विभाग, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय
मो. 8979551891



