बोतल में अंडा

बच्चो! कल्पना कीजिये कि आपके पास एक कांच की बोतल है, जिसका मुंह एक अंडे के आकार से छोटा है। अगर अंडे को उबाल दिया जाये तो क्या उसके बाद उसे तोड़े बिना बोतल के अंदर पहुंचाया जा सकता है? क्या कहा- नहीं। फिर सोचें। दरअसल, ऐसा करना मुमकिन है। आज के प्रयोग में मैं आपको यही बताने जा रही हूं कि उबले हुए अंडे को बिना तोड़े, बोतल के मुंह पर रखकर बोतल के अंदर इस तरह से पहुंचाया जा सकता है जैसे जादू हो गया हो, लेकिन यह सब विज्ञान के नियमों के अनुसार होता है। 
इस प्रयोग के लिए हमें जिन चीज़ों की ज़रूरत होगी वह हैं- एक उबला हुआ अंडा, जिसका छिलका पूरी तरह से उतार दिया गया हो, और जिसका आकार बोतल के मुंह से थोड़ा सा बड़ा हो। एक पतले मुंह वाली कांच की बोतल। एक माचिस या लाइटर। कागज़ के कुछ स्ट्रिप्स। अब हमें करना यह है कि कागज़ की स्ट्रिप्स को माचिस या लाइटर से जलाकर और जलती हुई को ही ध्यानपूर्वक कांच की बोतल के अंदर गिरा देना है। इसके बाद जल्दी से अंडे का चौड़ा हिस्सा बोतल के मुंह पर रख देना है। यह सुनश्चित करें कि अंडे से बोतल का मुंह पूरी तरह से बंद हो जाये यानी अच्छी सील लग जाये।  अब जादू होता हुआ देखें। जैसे ही जलती हुई कागज़ की स्ट्रिप्स बुझेंगी यानी जलना बंद हो जायेंगी, तो बोतल के अंदर प्रेशर (दबाव) कम हो जायेगा, और बाहर जो वातावरण का दबाव है वह अंडे को बोतल के अंदर धकेल देगा। अंडा धड़ाम से बोतल के अंदर गिरेगा, जैसे जादू हो गया हो।
ऐसा क्यों हुआ? जब आपने कागज़ की स्ट्रिप्स को जलाकर कांच की बोतल के अंदर डाला, तो आग की लपटों ने अंदर के एयर मोलिक्यूल्स को गर्म कर दिया। यह एयर मोलिक्यूल्स तेज़ी से एक दूसरे से दूर फैलने लगे, जिससे हवा भी फैल गई। इस विस्तार से हुआ यह कि हवा ने अधिक जगह ली और कुछ हवा बोतल के मुंह से भी बाहर निकल गई, आपके द्वारा अंडा ऊपर रखने से पहले। 
जब आग बुझ गई तो बोतल के अंदर की हवा ठंडी होने लगी। ठंडे होने की वजह से एयर मोलिक्यूल्स धीमे हो गये और एक-दूसरे के करीब आने लगे, उनके बीच की जगह कम हो गई। इससे बोतल के अंदर एयर प्रेशर कम हो गया और आंशिक वैक्यूम बन गया। 
बोतल के बाहर वातावरण का दबाव वैसा ही रहा और अब वह बोतल के अंदर के दबाव से कहीं अधिक हो गया। हवा प्राकृतिक रूप से उच्च-दबाव से कम-दबाव क्षेत्रों की तरफ जाती है- लेकिन अंडा अवरोध उत्पन्न किये हुए था। इसलिए वातावरण का दबाव अंडे को बोतल के अंदर धकेल देता है ताकि दबाव के अंतर में संतुलन बन जाये।
यह प्रयोग एयर प्रेशर के एक महत्वपूर्ण गुण के बारे में बताता है- हवा हमेशा हाई प्रेशर क्षेत्र से लो प्रेशर क्षेत्र की तरफ जाती है जब तक कि दबावों में संतुलन न आ जाये। यही पैटर्न हमारे सास लेने में भी लागू होता है। -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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