फुर्तीला और कुशल शिकारी श्वानमुख जलीय सर्प
श्वान मुख जल सर्प भारी शरीर वाला एक समुद्री सांप है। अंग्रेजी में इसे ‘डॉग फेस्ड पॉटर स्नेक’ कहते हैं श्वानमुख जलसर्प को पहले एक दुर्लभ सांप माना जाता था, किंतु इसके अध्ययन के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यह बहुत बड़ी संख्या में मिलने वाला जलीय सांप है। श्वानमुख जलसर्प भारत के सभी सागर तटों के आसपास मिलता है। इसके साथ ही यह अंडमान निकोबार द्वीप समूह तथा इसी तरह के कुछ अन्य द्वीपों पर भी बहुतायत से देखने को मिलता है। श्वानमुख सर्प नदियों के मुहानों, सागर तट के किनारे बने चट्टानी कुंडों, कीचड़ और दलदल वाले स्थानों तथा संकरी खाड़ियों में रहना अधिक पसंद करता है। यह दिन के समय प्राय: पत्थरों के नीचे, चट्टानों की दरारों में या केकड़ों द्वारा छोड़ी गई मांदों में आराम करता है। इस समय इसका सिर बाहर निकला रहता है। पानी में तैरते समय भी इसका सिर पानी के बाहर निकला रहता है तथा लंबी जीभ बाहर निकली हुई लपलपाती रहती है। श्वानमुख जलीय सर्प मोटा एवं मध्य आकार का पानी का सांप है। इसकी लंबाई 50 सेंटीमीटर से लेकर 70 सेंटीमीटर तक होती है, किंतु कभी-कभी 1.25 सेंटीमीटर लंबे सांप भी देखने को मिल जाते हैं। श्वानमुख जलीय सर्प के शरीर का रंग भूरा स्लेटी होता है एवं त्वचा पर काले रंग के अस्पष्ट पट्टे होते हैं। इसके ऊपर के आधे भाग पर काले और सफेद रंग की चार खानेदार डिजाइनें होती हैं तथा इसी प्रकार की चारखानेदार डिजाइनें इसके पेट पर भी होती हैं। श्वानमुख जलीय सर्प की त्वचा पर शल्क भी होते हैं, किन्तु इसके शल्क थोड़े उभरे हुए और बड़े फीके रंगों के होते हैं।
श्वानमुख जलीय सर्प के थूथुन व उसके आसपास का भाग कुत्ते जैसा दिखाई देता है। इसीलिए इसे श्वानमुख जलीय सर्प कहते हैं श्वानमुख जलीय सर्प का सर चौड़ा तथा गर्दन पतली होती है और सिर एवं गर्दन दोनों अलग-अलग साफ दिखाई देते हैं। इसकी आंखें छोटी होती हैं और अन्य जलीय सांपों की तुलना में सर के ऊपर की ओर होती हैं। इसके साथ ही इसकी दोनों आंखों के पास से एक-एक काली रेखा पीछे की ओर चली जाती है और पहले गहरी होती है और फिर धीरे-धीरे अस्पष्ट सी होती जाती है। श्वानमुख जलीय सर्प के नथुने इसके थूथुन के सिरे पर होते हैं। इससे इसे पानी में सांस लेने में सुविधा रहती है।
श्वानमुख जलीय सर्प अन्य सांपों की तरह एक मांसाहारी सांप है तथा सामान्य जलीय सांपों की तरह शिकार करता है। यह दिन के समय किसी सुरक्षित स्थान पर आराम करता है और रात में भोजन की तलाश में निकलता है, किंतु कभी-कभी इसे दिन में भी शिकार की खोज में घूमते हुए देखा गया है। श्वानमुख जलीय सर्प का प्रमुख भोजन मुहानों में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के समुद्री कीड़े-मकोड़े तथा मछलियां हैं। श्वानमुख सर्प एक फुर्तीला व कुशल शिकारी सांप है। यह अन्य जलीय सांपों के समान छोटे शिकार को तो एक ही झटके में पूरा का पूरा निगल जाता है, किंतु बड़े आकार को पहले घायल करके बुरी तरह शिथिल और लाचार कर देता है, इसके बाद निगलता है। श्वानमुखी सर्प प्राय: बरसात के मौसम में जमीन पर आ जाता है और मेंढक खाता है।
छवानमुख जलीय सर्प एक तेज और फुर्तीला सांप है। यह शत्रु को देखते ही उछलकर अपने बचाव का प्रयास करता है तथा अवसर मिलते ही किसी सुरक्षित स्थान की ओर भागता है। छवानमुखी सर्प विषैला नहीं होता, अत: मानव के लिए पूरी तरह हानि रहित है। मानव द्वारा परेशान करने पर भी यह मानव को काटता नहीं बल्कि फुर्ती से उछलकर अपना बचाव करता है। भारत में श्वानमुख जलीय सर्प का न तो शिकार किया जाता है और न ही इसे व्यावसायिक उपयोग में लाया जाता है, अत: इसकी संख्या भारत के समुद्री तटों पर पर्याप्त है।
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