प्रकृति का अनमोल उपहार है मानसून हवाएं
प्यारे बच्चो, मानसून शब्द का जन्म अरबी भाषा के शब्द ‘मौसम’ से हुआ, जिसका अर्थ है ‘मौसमी हवाएं’। मानसून हवाओं का जन्म जल और थल के तापमान के अन्तर के कारण होता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून हवाएं उनको कहा जाता है, जो मौसम के बदलने से अपनी दिशा बदल लेती हैं। बच्चो, ग्रीष्म ऋतु में यह हवाएं धरती से समुद्र की ओर चलती हैं। गर्मियों में मानसून हवाएं समुद्र से चलने के कारण जल-कण से भरपूर और ठंडी हैं और प्रत्येक निकलने वाले स्थान पर खूब बारिश करती है। बच्चो, भारतीय मानसून हवाओं को हिन्द महासागर के आस-पास अच्छी तरह देखा जा सकता है। इनका पुंज और वेग अन्य संसार की मानसून हवाओं के साथ बिल्कुल अलग है, क्योंकि हमारे भारत देश का थल विभाजन का आकार मानसून हवाओं के चलने में काफी बड़ा रोल पैदा करता है। दक्षिण-पश्चिम की मानसून हवाएं अरब सागर से उठ कर उत्तर दिशा की ओर और बंगाल की खाड़ी से उठ कर पूर्व दिशा की ओर चलती हैं। बच्चो, मानसून हवाएं भारत में पश्चिमी तटों पर 100-250 सैंटीमीटर, महाबलेशपुर (महाराष्ट्र) में 650 सैंटीमीटर और माहसिनराम (मेघालय) के गारो, खासी जैंतिया की पहाड़ियों के साथ टकरा कर 1187 सैंटीमीटर बारिश करती हैं। भारत में सबसे कम बारिश राजस्थान के जैसलमेर में 50 सैंटीमीटर होती है। बच्चो, संसार की सबसे अधिक बारिश भारत के मेघालय राज्य के माहसिनराम स्थान पर 1187 सैंटीमीटर होती है और सबसे कम बारिश अफ्रीका देश के सहारा और कालाहारी मरूस्थलों में 5 सैंटीमीटर होती है। अंतत: प्यारे बच्चो, प्रकृति के इस अनमोल उपहार ‘मानसून हवाओं’ का भविष्य में लाभ लेना है तो हम सभी को ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने पड़ेंगे।
-सरकारी मिडल स्कूल, धर्म सिंह वाला,
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