विज्ञापनों की शुरुआत कब हुई?
‘दीदी, आज हर जगह विज्ञापन हैं। मोबाइल फोन खोलो तो विज्ञापन, अखबार खोलो तो विज्ञापन, टीवी ऑन करो तो विज्ञापन... सड़क पर निकलो तो दीवारों पर विज्ञापन।’
‘हां, यह बात तो है। हम विज्ञापनों से घिरे हुए हैं, चूंकि विज्ञापन लोगों को किसी चीज़ के बारे में सूचना देने का तरीका हैं। यह सूचना किसी चीज़ को बेचने या सर्विस देने या कुछ करने का आग्रह या केवल अपना नाम पब्लिक के समक्ष लाने के लिए हो सकती है।’
‘जी, सही कहा आपने।’
‘तो फिर तुम क्या जानना चाहते हो?’
‘यही कि विज्ञापनों की शुरुआत कब हुई?’
‘यह बताना तो बहुत मुश्किल है।’
‘क्यों?’
‘विज्ञापन का उदय बहुत स्वभाविक रूप से हुआ और इसने बहुत शुरू से ही अनेक रूप लिए। मसलन, थेबस में एक पेपिरस की खोज हुई, जिसमें एक भगोड़े गुलाम को खोजने के लिए ईनाम की घोषणा थी। यह लगभग 3,000 साल पुराना पेपिरस है और वास्तव में एक विज्ञापन है!’
‘अच्छा!’
‘यूनान व मिस्र में तकरीबन 1,500 ईसा पूर्व घरों के बाहर साइनबोर्ड रखे जाते थे, जिन पर उपलब्ध सेवाओं के बारे में जानकारी होती थी- यह भी विज्ञापन का एक रूप ही था।’
‘शायद इसी वजह से आजकल दुकानों के ऊपर बोर्ड लगे होते हैं।’
‘हां। बहरहाल, प्रिंटिंग के अविष्कार के बाद विज्ञापन अतिरिक्त नये रूप लेने लगा। मसलन, लंदन में 1477 में पहले प्रिंटेड विज्ञापन में एक प्रार्थना पुस्तक की बिक्री की सूचना दी गई। यह विज्ञापन अंग्रेज़ी में था।’
‘और अखबारों में विज्ञापन कब शुरू हुए?’
‘लंदन के अखबार के पिछले पन्ने पर पहला अखबारी विज्ञापन 1625 में प्रकाशित हुआ था।’
‘यह विज्ञापन क्या पैसे देकर छपवाया गया था।’
‘पेड विज्ञापन सबसे पहले अमेरिका में 1704 में प्रिंट होने शुरू हुए। 1771 तक अमरीका में 31 अखबार छपने लगे थे और सभी में विज्ञापन हुआ करते थे।’
‘आजकल तो हर जगह विज्ञापन ही विज्ञापन हैं।’
‘हां। वैसे रेडियो पर पहला विज्ञापन 1920 में आया था। टीवी विज्ञापन दूसरे विश्व युद्ध के बाद शुरू हुए।’
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर

