बेहद ज़रूरी है प्लास्टिक कचरे से मुक्ति


73वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने का बहुत जरूरी आह्वान किया है, बल्कि कहना तो चाहिए इसमें एक किस्म से विलंब हो गया है। यह आह्वान तो कई साल पहले ही हो जाना चाहिए था, क्योंकि आज प्लास्टिक कचरा इतना खतरनाक हो चला है कि वैज्ञानिक बिना हिचकिचाए कह रहे हैं कि अगर इसे खत्म न किया गया तो यह सिर्फ  मानव को ही नहीं बल्कि समूची जीव प्रजाति को ही खत्म कर देगा। आज प्रत्येक भारतीय एक महीने में लगभग 20 से 25 ग्राम प्लास्टिक सामान्य जीवन जीते हुए निगलने को मजबूर है, जो उसके स्वास्थ्य पर 50 किस्म के संकट खड़े कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ  न्यूकासल ने भारतीयों पर किये गए अपने शोध से ये निष्कर्ष निकाले हैं।इस शोध के मुताबिक हमारे खाने-पीने के सामान,जूस और बोतलबंद पानी के अलावा नलों से आने वाले पानी के जरिये हर साल करीब 250 ग्राम या कहें 52 हजार से ज्यादा माइक्रो-प्लास्टिक कण हमारे शरीर में पहुंच रहे हैं। इसमें अगर वायु प्रदूषण को भी मिला दें तो एक व्यस्क इन्सान के शरीर में हर साल करीब 1,21,000 माइक्रोप्लास्टिक कण जा रहे हैं। ये सेहत के लिये बहुत ही खतरनाक हैं। भारत 2018 में पूरी दुनिया के लिये पर्यावरण दिवस का आयोजक था। इस मौके पर भारत सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया था कि 2022 तक एक बार उपयोग कर फेंके जाने वाले प्लास्टिक को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा। इसके बाद सरकार के स्तर पर कई बार वन टाइम यूज प्लास्टिक को बैन करने के लिए प्रयास किए गए लेकिन सख्ती के अभाव में इनका कोई फायदा नहीं हुआ। इसलिए प्रधानमंत्री को इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से इसका आह्वान करना पड़ा।दरअसल वैज्ञानिकों के अनुसार एक बार यूज होने वाली प्लास्टिक सबसे ज्यादा खतरनाक है और प्लास्टिक कचरे में सबसे ज्यादा मात्रा इसी सिंगल यूज प्लास्टिक की ही होती है। हर साल उत्पादित होने वाले ऐसे कुल प्लास्टिक में से महज 20 फीसद ही रिसाइकिल हो पाता है। 39 फीसद जमीन के अंदर दबाकर नष्ट किया जाता है, जबकि 15 को जला दिया जाता है। प्लास्टिक के जलने से उत्सर्जित होने वाली कार्बन डायऑक्साइड की मात्रा भी 2030 तक बढ़कर तीन गुना हो जाएगी। इससे हृदय रोग के मामले में तेजी से वृद्धि होने की आशंका है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से देश की जनता और खासतौर पर दुकानदारों, व्यापारियों से सिंगल यूज प्लास्टिक यानी ऐसे प्लास्टिक के सामान जिन्हें हम एक बार इस्तेमाल करके फेंक देते हैं जैसे कैरी बैग आदि के बैन पर योगदान  की अपील की है। पूरी दुनिया में प्लास्टिक का इतना ज्यादा इस्तेमाल होता है कि हर साल तकरीबन 10.4 करोड़ टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में मिल जाता है। वैज्ञानिक चिंता जता रहे हैं कि अगर प्लास्टिक कचरे के विरुद्ध युद्ध स्तर पर कोई प्रयास नहीं हुए तो साल 2050 तक समुद्र में मछली से ज्यादा प्लास्टिक के टुकड़े हो जायेंगे। प्लास्टिक के मलबे से समुद्री जीव बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। कछुओं की दम घुटने से मौत हो रही है तो व्हेल भी इसके जहर का शिकार हो रही हैं। प्रशांत महासागर में द ग्रेट पैसिफिक गार्बेज पैच प्लास्टिक कचरे से इस तरह प्रभावित है कि यहां पर 80 हजार टन से भी ज्यादा प्लास्टिक जमा है। इसलिए यह भारत की नहीं, पूरी दुनिया की बड़ी समस्या है। प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि वे दो अक्टूबर के दिन  सारा सिंगल यूज प्लास्टिक जो उनके घर में है, उसे इकट्ठा करें और अपने नगर निगम के पास या स्वच्छता कर्मचारी के पास सारा जमा करा दें और देश को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त कराने में सहयोग दें।देश में केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) सहित विभिन्न राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों के 35 प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हैं, लेकिन 2017-18 में इनमें से केवल 14 बोर्डों ने ही प्लास्टिक के कचरे के बारे में सीपीसीबी को जानकारी दी। इस जानकारी से हासिल आंकड़ों के मुताबिक साल 2017-18 में भारत में करीब 6.5 लाख टन प्लास्टिक का कचरा पैदा हुआ, जबकि एक अनुमान के मुताबिक पिछले सात दशकों में पूरी दुनिया में करीब 8 अरब 30 करोड़ टन प्लास्टिक का उत्पादन हो चुका है। दुनिया में हर साल अकेले 500 अरब प्लास्टिक की थैलियां ही इस्तेमाल होती हैं, जबकि प्लास्टिक की थैलियों के अलावा प्लास्टिक के गिलासों, कटोरियों, चम्मचों, बोतलों, डिब्बों, प्लेटों, टयूब-टायरों, कॉन्टेक्ट लेंस, मोबाइल फोन, पेन-पेंसिलों आदि न जाने कितनी ही चीजें हम रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल करते हैं। करीब 7000 किस्म की चीजें प्लास्टिक की बनती हैं। प्लास्टिक से बनी ये सभी चीजें इस्तेमाल के बाद प्रदूषण का जरिया बनती हैं। प्लास्टिक का कचरा सेहत के लिए कितना खतरनाक है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह 15 किस्म के  कैंसर के लिए जिम्मेदार है। यहां तक कि बच्चों के खिलौने की प्लास्टिक भी सेहत का जबर्दस्त नुक्सान होता है। इसलिए यूरोप और जापान में इस तरह के खिलौनों पर पूर्ण प्रतिबंध है। प्लास्टिक से भी अनेक तरह की समस्याएं हो रही हैं, इसलिए इससे मुक्ति का अभियान छेड़ना ही पड़ेगा। इसलिए  प्रधानमंत्री ने व्यापारियों और दुकानदारों से कहा है कि वे इसमें अपना विशेष योगदान दें। प्रधानमंत्री के मुताबिक दुकानदार अपनी दुकानों में कई तरह के बोर्ड लगाते हैं, अब वह इनमें एक बोर्ड और लगाएं जिसमें लिखा हो हमसे प्लास्टिक बैग की अपेक्षा न करें, साथ ही उन्होंने दुकानदारों और व्यापारियों को सुझाव दिया कि वह दीपावली के मौके पर ग्राहकों को डायरी और कैलेंडर आदि गिफ्ट में देते हैं। इस बार वह थैला गिफ्ट करें, इससे देश के गरीबों, किसानों और विधवाओं की भी मदद होगी क्योंकि इससे उनकी आर्थिक मदद सम्भव होगी। 

—इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर