कैनेडा के संसदीय चुनावों में अपनों ने पंजाबी को भुलाया, बेगानों ने अपनाया


एबटसफोर्ड, 13 अक्तूबर (गुरदीप सिंह ग्रेवाल): रूस का प्रसिद्ध लेखक रसूल हमजातोव अपनी पुस्तक मेरा दागिस्तान में लिखता है कि हमारे देश में यदि किसी को अभिशाप देना हो तो उसको कह दिया जाता कि जा तुझे तेरी मां बोली भूल जाए परन्तु जहां अपनी ही मां बोली को भूला दिया जाए तो इससे बुरी बात ओर क्या हो सकती है 21 अक्तूबर को कैनेडा के हो रहे संसदीय चुनावों में ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है। इन चुनावों में 50 पंजाबी प्रत्याशी कैनेडा के सांसद बनने हेतु एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं परन्तु रोचक पहलू यह है कि पंजाबियों की भारी आबादी वाले क्षेत्रों में खड़े इन कई प्रत्याशियों से सड़कों पर लगाए गए उनके नामों वाले चुनाव साईन बोर्डों से पंजाबी बिल्कुल गायब है जबकि कई गैर पंजाबी प्रत्याशियों द्वारा अपने नाम प्रमुखता से पंजाबी में लिखे गए हैं। इस सम्बन्धी जब एक पंजाबी प्रत्याशी से बातचीत की गई तो उसका बड़ा हास्यप्रद जवाब था वह कहता हमारे बारे अंग्रेज़ों को बताना जरूरी है पंजाबी भाईचारा तो हमें पहले ही जानना होता है।