धरती पर ज़न्नत


कश्मीर की धरती अद्भुत कीमती फसलों की जन्मदाती है। आयुर्वेद की मूल जड़ है इस धरती की वनस्पति। प्रकृति की कोई भाषा नहीं होती परन्तु इसको प्रत्येक प्राणी महसूस कर सकता है। कश्मीर में जब कुदरत सुंदर पहाड़ियों के नगन तन पर दस्तख़्त करती है तो वातावरण में ठंडक अपने जलवे का मज़ा दे देती है। कश्मीर (श्रीनगर) में डल झील सबसे भव्य विश्व प्रसिद्ध देखने वाला स्थान है। यहां कुदरत ने प्रत्येक शै (वस्तु) में सुंदरता भरकर परमात्मा के रूप का एक भाग अलंकार कर दिया है। प्रकृति अपने गुल़फाम अभिवादन में अभिवंदन करती प्रतीत होती है। डल झील का पानी कई रंगों में अपने रूप बदलता है। कुदरत का अद्भुत रूपमान अनुपम नज़ारा। प्रकृति जैसे भव्य, मर्मस्पर्शी विभिन्न विधायों में दृश्यवालियों का साहित्या लिख रही हों।स्वच्छ पानी की यह भारत की सबसे बड़ी झील है। इसकी कुल लम्बई 8 किलोमीटर तथा चौड़ाई 4 किलोमीटर है। डल झील को श्रीनगर का ‘हृदय’ भी कहा जाता है। इस झील के साथ मुगल ब़ाग शोभनीय हैं। जैसे चश्मेशाही, नेहरू पार्क, परि ब़ाग, निशात ब़ाग, शालीमार ब़ाग। डल झील के चारों ओर ऊंचे, नाटे हरियाली भरे पर्वत जैसे लोगों को शुभकामना, आशीर्वाद दे रहे हों। यह प्राचीन डल झील आज भी आधुनिकता के परिधान में कश्मीर की संस्कृति को धनाढ्य करने आने में हमेशा अनवरत तत्पर रहती है। सुबह-शाम हवा की हल्की सुरसुरी जिस्म में एक दिव्य आनंद का एहसास देती प्रतीत होती है। भव्य दृश्यावालियों से माला माल कश्मीर। रात के समय शिकारे (सुसज्जित नांव) में बैठकर घूमने का अपना ही नज़ारा होता है। रात के समय चमचमाती रोशनी में, चंद्रमा की ठंडी लौ में सारी झील दुल्हन की भांति अलंकारित हो जाती है। रात से समय जग-मग-जग झील को ‘गोल्डन झील’ की संज्ञा दी जाती है। रात से समय झील में पड़ती रोशनी ऐसी प्रतीत होती है जैसे सारा पानी ही रोशनी का पर्यायवाची हो गया हो। झील के पानी में कई तरह की सब्ज़ियां भी पैदा की जाती हैं। इस स्थान को ‘वैजीटेबल लैंड’ कहते हैं। झील के बीच वाले बाज़ार को ‘मीना बाज़ार’ कहते हैं। यह लगभग 25 किलोमीटर लम्बा है। इस वैजीटेबल लैंड में टमाटर, कद्दू, खीरा, खरबूजा आदि की फसल बोई जाती है। इस सारी झील को देखने के लिए कम से कम दो दिन लगते हैं।इस झील के समीप ही जनरवान तथा महा देव पर्वत है तथा पहाड़ों की चोटियों पर सारा वर्ष बर्फ पड़ी रहती है।हाऊसबोटस इस झील की सुंदरता को जन्नत का दर्जा देने की गवाही भरते हैं। खूबसूरत साज-सज्जा से संवरे, आद्वितीय रंग-बिरंगे, मर्मस्पर्शी आधुनिक निर्माणशैली में हाऊस बोट वाकई जन्नत का आभास देते हैं। यह सुंदर हाऊसबोट झील के किनारे एक लम्बी कतार में खड़े पर्यटकों का खामोश अभिवादन करते महसूस होते हैं।सैलानी इन हाऊसबोटस में रहना ज्यादा पसंद करते हैं। एक हाऊसबोट में कई कमरे होते हैं। कमरे तथा सहूलियत हाऊसबोट के आकार तथा बनावट, सजावट पर निर्भर होती है। एक हाऊसबोट में दस से बारह आदमी रह सकते हैं। हाऊसबोट तक जाने के लिए मालिक शिकारा भेजते हैं जिसका किराया हाऊसबोर्ट में शामिल होता है। शाम को हाऊसबोट की बालकानी या छत के ऊपर बैठ कर डल झील का नज़ारा लिया जाता है जो मस्तिष्क में सदैव अंकित हो जाता है। यहां फोटोग्राफी अपनी पहचान छोड़ती है।कश्मीर में अनेकानेक स्थान देखने योग हैं विशेष करके मुगल ब़ाग, चश्मेशाही, निशांत ब़ाग, शालीमार तथा 90 किलोमीटर दूर पहलगाम चंदनवाड़ी, गुल, सोन मर्ग, अल्ला पत्तरी, बेताब वैली, आडू वैली, ट्यूलिप ब़ाग तथा कई अन्य वैलियां।