साधना के लिए खास गुप्त नवरात्र


आमतौर पर हम लोग साल में दो बार आने वाले नवरात्र के बारे में जानते हैं। एक चैत्र माह में आने वाले ग्रीष्म नवरात्र और दूसरे आश्विन माह में आने वाले शारदीय नवरात्र। लेकिन धार्मिक विधान के मुताबिक दो नहीं बल्कि हर साल 4 बार नवरात्र आते हैं। चैत्र और आश्विन के अलावा आषाढ़ और पौष माह में भी नवरात्र आते हैं। लेकिन इनमें कोई सार्वजनिक कार्यक्रम सम्पन्न नहीं होते। इसलिए इन्हें लोग नहीं जानते। इन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं। आगामी 3 जुलाई से आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्र शुरू हो रहे हैं। आषाढ़ सुदी प्रतिपदा (परेवा) से लेकर नवमी तक, साल के पहले गुप्त नवरात्र सम्पन्न होंगे। ये नवरात्र मूलत: साधकों को समर्पित होते हैं। इन्हें आमतौर पर गृहस्थ लोग नहीं मनाते। हालांकि अगर नियमों का पालन करके कोई गृहस्थ इन्हें मनाता है तो उसे फायदा ही होगा, नुकसान नहीं। लेकिन चूंकि गुप्त नवरात्र के विधान भिन्न हैं, पूजा पद्वति ज्यादा कड़ी और अनुशासित है। इसलिए आमतौर पर गृहस्थ लोग इन गुप्त नवरात्र को नहीं मनाते। गुप्त नवरात्र में भी मां देवी की साधना की जाती है। ये नवरात्र साधकों के लिए गृहस्थों वाले नवरात्र से कहीं ज्यादा खास होते हैं। दरअसल इन नवरात्रों को गुप्त नवरात्र इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि इन नवरात्रों में की जाने वाली साधना गुप्त रह कर की जाती है। यही वजह है कि आम गृहस्थ लोग इससे बचते हैं।  क्योंकि आखिर वे लोग गुप्त साधना के लिए कहां जाएंगे? तांत्रिक लोग इन नवरात्र का इंतजार करते हैं और गुप्त नवरात्र आते ही वे किसी शक्तिपीठ में पहुंचकर गुप्त रूप से मां देवी की साधना में लीन हो जाते हैं। माना जाता है कि गुप्त नवरात्र में की जाने वाली साधना से देवी जल्द प्रसन्न होती हैं। इन नवरात्रों में भी पहले दिन शैल पुत्री,दूसरे दिन ब्रह्मचारणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा होती है। कहने का मतलब गुप्त नवरात्र में भी देवी पूजा का क्त्रम वही होता है, जो सामान्य नवरात्र में होता है। इन गुप्त नवरात्रों के पीछे जो एक पौराणिक कथा है, उसके मुताबिक प्राचीनकाल में श्रृंगी ऋ षि एक बार अपने भक्तों को प्रवचन दे रहे थे। तभी उन भक्तों के बीच बैठी एक स्त्री बोली, ‘मेरे पति दुर्व्यसनों से घिरे हैं। इस वजह से मैं धार्मिक कार्य व्रत-उपवास, अनुष्ठान नहीं कर पाती हूं। मैं मां दुर्गा की शरण में जाना चाहती हूं, लेकिन पति की वजह से ऐसा नहीं कर पाती। ऋ षिवर मेरा मार्गदर्शन करें।’ इस पर श्रृंगी ऋ षि बोले, ‘चैत्र और शारदीय नवरात्र में तो हर कोई पूजा करता है लेकिन इनके अलावा साल में दो बार गुप्त नवरात्र भी आते हैं। इनमें नौ देवियों की बजाय 10 महाविद्याओं की उपासना की जाती है। अगर तुम विधिवत ऐसा कर सको तो मां दुर्गा की कृपा से तुम्हारा जीवन खुशियों से भर जाएगा।’ यह सुन स्त्री ने गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की कठोर साधना की। मां दुर्गा उसकी साधना से प्रसन्न हुई और उसके पति को सद्बुद्धि आ गई। इस तरह उस स्त्री की गृहस्थी संपन्न और खुशहाल हो गई।