देश में सड़कें बन रही हैं मौत की मंज़िल


सड़क दुर्घटनाओं की खबरें अब नियमित  रूप से समाचारों में देखने-पढ़ने व सुनने को मिल जाती हैं। अफसोस और उससे अधिक चिंता की बात यह है कि इन घटनाओं में लगातार इजाफा ही हो रहा है। दो पहिया वाहन से लेकर चार पहिया वाहन और भारी वाहन तक कोई भी इससे अछूता नहीं है। इत्तेफाक से जहां केंद्र सरकार मोटर वाहन अधिनियम में महत्त्वपूर्ण संशोधन कर चुकी है, वहीं राजधानी की प्रदेश सरकार ने भी अभी कुछ समय  पूर्व ही सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या के कारणों का अध्ययन  करके  इसे दूर करने के लिए जरूरी उपाय समेत परिवहन परिचालन व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कई उपचारात्मक कदम उठाए हैं। पिछले दो दशकों में सड़क दुर्घटनाओं में लगातार वृद्धि होने के कुछ  प्रमुख कारणों को रेखांकित किया जाए तो वे कुछ इस तरह सामने आते हैं। इन कारणों में सबसे पहला और सबसे मुख्य कारण खुद सड़कें हैं। भारतीय रोड रिसर्च संस्थान की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि  मानक नियमों की अनदेखी, रख-रखाव व पुनर्निर्माण में लापरवाही तथा दिल्ली जैसे महानगरों में सड़कों पर भागते वाहनों का दस गुना अधिक दबाव स्थिति को बेहद नारकीय बना रहा है। भारत जैसे देशों जहां परिवहन नियमों की अनदेखी के कारण एक्सप्रेस वे तथा विशेष कारीडोर में भी सड़क दुर्घटनाओं में काफी इजाफा होता रहा है। दिल्ली से सटा आगरा एक्सप्रेस वे तो इन सड़क दुर्घटनाओं के कारण कुख्यात सा हो गया है। अगली बड़ी वजह है भारत में चलाए जा रहे व निर्मित वाहनों में अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों की अनदेखी। दुर्घटना के पश्चात पड़ने वाले प्रभाव  व यात्रियों को उससे होने वाले नुकसान के लिए किये गए एक परीक्षण में 10 में से सिर्फ 3 ही वो भी आंशिक रूप से सफल रहीं। अन्य सात में चालक व यात्रियों के बचने की संभावना बहुत कम रही। विडम्बना देखिये कि एक तरफ जहां नई स्कूटी मोटर साइकिल में 24 घंटे अनवरत जलने वाली हेडलाइट का प्रयोग किया जा रहा है वहीं सर्दियों में धुंध  के बीच ड्राइविंग करने के लिए प्रयोग की जानी वाली विशेष पीली रोशनी हेड लाइट का प्रयोग न के बराबर होता है। सर्दियों में धुंध व कोहरा सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण है। दुर्घटना के लिए जिम्मेदार कारकों में एक और मुख्य कारण है शराब पीकर गाड़ी चलाना। ‘शराब पीकर गाड़ी न चलाएं’ यह वाक्य लगभग हर सड़क और राजमार्गों पर लिखा होता है ,सिर्फ एक इस नियम के पालन से देश में दुर्घटनाओं की संख्या में 50 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है। एक बात और उल्लेखनीय है कि ऐसे मामलों में चालक और पीड़ित की मौत की संभावना 78 प्रतिशत तक अधिक हो जाती है। शराब पीकर वाहन चलाने वाले किसी आत्मघाती आतंकी की तरह होते हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि सरकार, प्रशासन व पुलिस इससे चिंतित नहीं है या इनकी रोकथाम के लिए कोई उपाय नहीं कर रही है। मई 2018 में दिल्ली की प्रदेश सरकार ने ‘दिल्ली सड़क सुरक्षा नीति’ को प्रस्तुत करते हुए जानकारी दी कि राजधानी दिल्ली में इस वक्त लगभग 11 करोड़ पंजीकृत वाहन हैं व प्रतिवर्ष 7 लाख नए वाहनों का पंजीकरण होता है। इसके बावजूद वर्ष 2011 से अब तक सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में मामूली ही सही मगर कमी तो आई है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने अभी हाल ही में मोटर वाहन दुर्घटनाओं के लिए चालकों को अधिक सजग व सतर्क करने के उद्देश्य से मोटर वाहन दुर्घटना अधिनियम में भारी संशोधन कर नियमों की अवहेलना करने वाले दोषियों पर अधिक जुर्माने व दंड का प्रावधान कर अपनी मंशा जता दी है किन्तु ये सभी उपाय, नियम तभी प्रभावी व सार्थक होंगे जब व्यक्ति खुद संवेदनशील व जिम्मेदार होगा। फिलहाल तो ये सड़कें मौत की मंजिल बनी हुई हैं। (युवराज)