सद्गुणों का मूल्य


अमरीका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को बचपन में महापुरुषों के जीवन चरित्र पढ़ने का शौक था, किन्तु घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण वे पुस्तकें खरीद नहीं सकते थे, मांगकर लाया करते थे। एक बार वह एक बड़े आदमी से एक पुस्तक उधार लाए। उस आदमी ने कहा-‘देखो, मेरी पुस्तक खराब न हो और जल्द से जल्दी लौटा दें।’वह पुस्तक ले आए। जाड़े के दिन थे। घर में आग जलती थी, लिंकन उसी के प्रकाश में पुस्तक पढ़ते थे। एक दिन वह रात गए तक पुस्तक में खोये रहे और जब नींद आने लगी तो पुस्तक को जंगले में रखकर सो गए। सवेरे उठे तो देखा कि रात को वर्षा आई और पुस्तक भीगकर खराब हो गई। अब क्या हो? वह बहुत घबराये और रोते-रोते उस आदमी के पास गए। उसे सारी बात सुनाकर कहा-‘मैं क्या करूं?’ उस आदमी ने खराब पुस्तक लेने से इन्कार कर दिया।  नई पुस्तक लाकर देने को उनके पास पैसे न थे। सोच-विचार के बाद उस आदमी ने कहा-‘अच्छा, तुम तीन दिन मेरे खेत पर धान काटने का काम करो और पुस्तक के मूल्य की भरपाई कर दो।’ लिंकन राजी हो गए और तीन दिन तक उसके खेत पर काम करते रहे। अपने इस सद्गुण के कारण ही वह अमरीका के सर्वोच्च स्थान पर आसीन हुए। 

-धर्मपाल डोगरा‘मिन्टू’