दुविधा

वाह पेट्रोल भरवाने के बाद हवा भरवाने के लिए प्रतीक्षा कर रहा था। आगे वाली गाड़ी के टायरों में पेट्रोल पंप का कर्मचारी हवा भर रहा था। चारो टायर में हवा भरने के बाद वह पाइप को समेटने लगा। इतने में गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर बैठा आदमी जो निश्चित रूप से गाड़ी का मालिक था, ने खिड़की से हाथ निकाल कर दस का नोट उसे देने लगा। वह सकपकाया। शायद कंपनी की ओर से मनाही थी टिप लेने की। उसने नोट लेने से मना किया। 
ड्राइवर ने उसे रखने का इशारा किया। कर्मचारी ने इधर उधर देखा कि कोई देख तो नहीं रहा। जब निश्चित हो गया कि कोई नहीं देख रहा तो धीरे से नोट लेकर अपनी जेब में सरका लिया। ड्राइवर ने गाड़ी आगे बड़ा दी। इस घटना को लेकर वह दुविधा में पड़ गया कि उस व्यक्ति ने कर्मचारी को नोट देकर उसे सहारा दिया है या उसे नैतिक रूप से बेसहारा बनाया है। 

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