फिरोजपुर शहर के कालू राम की सूचना पर पकड़े गए थे क्रांतिकारी


फिरोजपुर, 2 अप्रैल (चरनप्रीत सिंह) : फिरोजपुर शहर तूड़ी बाजार के गुप्ता ठिकाने की खोज करने वाले फिरोजपुर रेल मंडल के लैंड विभाग के एस.एस.ई और लेखक राकेश कुमार ने एक-एक नया खुलासा किया है। राकेश कुमार ने अपनी खोज एवं गिरफ्तार किए गए क्रांतिकारियों के लेख से पता लगाया है कि क्रांतिकारी गया प्रसाद, जय देव और शिव वर्मा के लिखे-लेख से पता चला है कि उनकी गिरफ्तारी फिरोजपुर शहर के तूड़ी बाजार के ही रहने वाले कालू राम नाम के व्यक्ति की मुख्बरी से हुई थी। राकेश ने बताया कि कालू राम की मुख्बरी और अंग्रेजों के प्रति उनकी दिलचस्पी के कारण ही देश के महान क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी अंग्रेज सरकार की तरफ से की गई थी। लेखक राकेश कुमार ने बताया कि लंबी खोज के बाद उन्हें पता लगा है कि क्रांतिकारी गया प्रसाद और शहीद सुखदेव ने साफ लिखा है कि शहर मे हजाम का काम करने वाले कालू राम ने देश की आजादी के लिए जंग लड़ने व जंग लड़ने वालों का साथ देने की बजाए अंग्रेजी हकूमत का साथ दिया था। राकेश ने बताया कि उनके खोज के अनुसार क्रांतिकारियों की खिलाफ अंग्रेजों ने गुप्ता ठिकाने की सूचना देने वाले 19 गवाहों में से कालू राम भी शामिल था। कालू राम जानता ता कि शहर में गया प्रसाद ने क्रांतिकारी पार्टी के निर्देश पर शहर के तूड़ी बाजार में ही डाक्टर बी.एस निगम के नाम से दवाखना खोला हुआ था। वहीं पर ही गुप्ता ठिकाना बनाया था, जहां शहीद भगत सिंह, राज गुरु, सुखदेव के अलावा करीब एक दर्जन अन्य क्रांतिकारी आया जाया करते थे। यह लोग वहां के गुप्त ठिकाने में 10 अगस्त 1928 से लेकर 09 फरवरी 1929 तक आते जाते रहे और अपनी गितिविधियों को अंजाम देते रहे। राकेश ने बताया कि कालू राम इन सभी देश प्रेमियों के फिरोजपुर के गुप्त ठिकाने को छोड़ने के करीब ड़ेढ माह बाद एक दिन किसी कार्य से कार ने सवार होकर सहारनपुर जा रहा था। इसी दौरान जब वह एक दुकान पर रुका हुआ था तो उसकी नजर डाक्टर निगम यानी डाक्टर गया प्रसाद पर पड़ गई और उसने उन्हें नमस्ते कही और साथी ही उनके सहारनपुर में होने की सूचना कालू ने अंग्रेजों को दे दी। सूचना मिलते ही अंग्रेजों ने 13 मई 1928 के सहारनपुर के गुप्त ठिकाने चौबे परोश मोहल्ले पर छापामारी की और वहां से शिव वर्मा और जय देव को गिरफ्तार कर लिया। दो दिन बाद जब गया प्रसाद वहां पहुंचा तो उसे यह जानकारी नहीं थी कि गुप्त ठिकाने पर पुलिस ने छापा मारकर शिव वर्मा और जय देव को पकड़ लिया था, गया प्रसाद जैसे ही ठिकाने पर पहुंचा तो पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। 
स्पैशल ट्रिब्यिनल ने दिया था कड़ा फैसला : देश की आजादी के दिवानों की गिरफ्तारी के उस समय अंग्रेजी सरकार के स्पैशल ट्रिब्यिनल ने 7 अगस्त 1930 को 15 क्रांतिकारियों की किस्मत का फैसला सुनाया। जिसमें शहीद-ए-आजम स.भगत सिंह, शहीद राजगरुर, शहीद सुखदेव को फांसी की सज़ा सुनाई गई थी।
इन्हें हुई थी ऊम्रकैद : इनके अलावा क्रांतिकारी डाक्टर गया प्रसाद, शिव वर्मा, जय देव कपूर, किशोरी लाल, महावीर सिंह, निजय सिंहा, कमल तिवारी को ऊम्रकैद काले पानी की सजा सुनाई गई थी। 
इन्हें हुई थी कुछ सालों की सज़ा : इनके साथ ही कुंदन लाल को सात साल कैद, प्रैम कुमार को पांच साल कैद हुई। इनके अलावा तीन लोगों को रिहा कर दिया गया था जिनमें देस राज, अजय घोष तथा जितेंद्र नाथ के नाम शामिल है। लेखक राकेश ने बताया कि वह अभी और खोज कर रहे है उन्हें पूरी उम्मीद है कि इसी मामलें में कुछ नई जानकारियां सामने आ सकती है।