पंजाब उप चुनाव मुद्दा अकाली दल सरकारी कारगुजारी, भाजपा राष्ट्रीय एकता व कांग्रेस के हाथ खाली


जालन्धर,  18 अक्तूबर (मेजर सिंह): पंजाब में हो रहे विधानसभा उप-चुनाव में अब जब चुनाव प्रचार के लिए सिर्फ एक दिन बाकी रह गया तो मुद्दों बारे बात पूरी तरह निखर कर सामने आ गई है। इन चुनावों में अकाली दल पंजाब सरकार की कारगुजारी पर हमलावर रुख अपना कर चल रहा है, भाजपा राष्ट्रीय एकता के राष्ट्रीय मुद्दे के इर्द घूम रही है, जबकि कांग्रेस के चुनाव मुद्दे के मामले में हाथ खाली ही हैं। पंजाब सरकार की पौने तीन वर्ष की सरकारी कारगुजारी पर कांग्रेस ताकि चुनाव प्रचार दौरान रोड शो पर निकले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह भी किए मान के साथ कोई बात नहीं कह सके। पिछले चार वर्ष से अकालियों को परास्त करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे बेअदबी मुद्दे की आंच अब खुद कांग्रेस के पंख जलाने की तरफ होने कारण मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेताओं ने पूरे उप-चुनाव में इस मुद्दे का नाम लेना भी छोड़ दिया है। बेअदबी सहित बहिबल कलां की घटना बारे लोग कैप्टन सरकार की कारगुज़ारी पर सवाल खड़े करने लगे हैं। इस करके कांग्रेस के समूचे प्रचार में यह मुद्दा ही गायब हो गया है। कांग्रेस चारों ही हलकों में अधिकतर उम्मीदवारों के हिसाब से चुनाव प्रचार को हवा दे रहा है। जलालाबाद में कांग्रेस उम्मीदवार की अमीरी भारी है तो दाखा में उम्मीदवार का सरकार-दरबार दबदबा उभारा जा रही है। मुकेरियां में विधायक की मौत की हमदर्दी लेने का पक्ष भारी है और फगवाड़ा में अभी सवा दो वर्ष और सरकार के प्रचार से लाभ लिया जा रहा है। और तो और किसानों का कर्जा माफ करने को बड़ी प्राप्ति कहती आ रही सरकार ने अब इस बारे में बात करनी भी छोड़ दी है। अकालियों द्वारा पंजाब में बिगड़ रहे अमन कानून पर मुख्यमंत्री तक लोगों की पहुंच न होने को भी मुद्दे के रूप में उभारा है। वह यह भी कह रहे हैं कि अफसरशाही प्रशासन में भारी है और भ्रष्टाचार का बोलाबाला है। 
भाजपा का राष्ट्रीय एकता पर जोर 
भारतीय जनता पार्टी ने फगवाड़ा व मुकेरियां में राष्ट्रीय एकता के मुद्दे पर भी अधिक जोर दिया है। भाजपा नेता मोदी सरकार की प्राप्तियों, खास कर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करके देश की एकता को मजबूत करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। हरियाणा चुनावों को लेकर अकाली-भाजपा गठजोड़ बारे उठने वाले सवालों पर रोक लगाते हुए दोनों पार्टियों के नेता उप-चुनाव में आपसी एकजुटता का दिखावा करने में सफल रह रहे हैं परन्तु भाजपा की समूची लीडरशिप उपचुनावों में एकजुट होकर न कूदने की बात पार्टी हलकों में रड़क रही है।