गुरु ग्रंथ साहिब के 16 दुर्लभ सरूप संगत के दर्शन के लिए विशेष बस से रवाना


पटियाला, 21 अक्तूबर (परगट सिंह): पंजाब सरकार की ओर से गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को समर्पित समागमों की लड़ी के तहत श्री गुरु ग्रंथ साहिब के सोने, हीरे और लालों की सियाही से बने 16 पवित्र पुरातन और दुर्लभ हस्त लिखित सरूपों को पंजाबी यूनिवर्सिटी से संगतों के दर्शनों के लिए एक विशेष बस  द्वारा केबनिट मंत्री सुखजिन्दर सिंह रंधावा, मुख्य मंत्री कैप्टन के प्रमुख सचिव सुरेश कुमार, पंजाबी यूनिवर्सिटी के उप -कुलपति डा.बी.एस. घुम्मन और सरबत का भला ट्रस्ट के संस्थापक डा. एस.पी.एस. ओबराए की तरफ से पूर्ण मर्यादा के साथ बस में सुशोभित कर बस को रवाना किया। अत्याधुनिक सहूलतों के साथ लैस बस सरबत का भला चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक डा.एस.पी. सिंह ओबराय की तरफ से 62 लाख की लागत के साथ तैयार करवाई गई है। इस मौके सुखजिन्दर सिंह रंधावा और सुरेश कुमार ने 21 से 24 अक्तूबर तक चलने वाले विशाल पुस्तक मेले की भी शुरूआत करवाई। इस से पहले ‘कलि तारण गुरु नानक आया’ विषय पर करवाई विचार चर्चा में ‘अजीत प्रकाशन समूह’ के कार्यकारी संपादक सतनाम सिंह मानक ने गुरु नानक देव जी बारे कहा कि गुरु नानक साहिब की सब से बड़ी देने एक सह -असित्तव वाले समाज की सृजन करना था जहां किसी भी धर्म या फ़िरके में कोई नफ़रत ना हो। गुरु साहिब के समय बीच वाले ऐतिहासिक पृष्टभूमि के विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि उस समय के माहौल में जब हिंदू और मुस्लिम धर्म में एक खींच तान चल रही थी तो गुरु साहिब ने अपने फलसफे के द्वारा दोनों के बीच एक ख़ास संतुलन कायम करने में अपनी अहम भूमिका निभाई। प्रोफ़ैसर और प्रमुख श्री गुरु ग्रंथ साहिब अध्ययन विभाग डा. सरबजिन्दर सिंह ने बताया कि बस पर लगा डिजिटल डिसप्ले बोर्ड सरूपों बारे पंजाबी, अंग्रेज़ी समेत बाहर के राज्यों के सफ़र दौरान वहां के स्थानीय भाषायों में जानकारी देगा।  इस मौके डेरा बाबा नानक से विशेष तौर पर पहुंचे नौजवान सिमरनप्रीत सिंह की तरफ से हाथ लिखित पोथियां भी प्रदर्शित की गई। इस मौके डा. अमरजीत सिंह ग्रेवाल, डा.एम.एस. निज्जर, डा. जी.एस. बत्रा, डिप्टी कमिश्नर कुमार अमित, एस.डी.एम. रवीन्द्र सिंह अरोड़ा, एस.पी. सीटी वरुण शर्मा, डी.एस.पी. सौरव जिन्दल बड़ी संख्या में गणमान्य मौजूद थे।