खाना खिलाने का भी होता है सलीका


खाने पीने का जहां तक सवाल है, इस सम्बन्ध में तो विशेष सफाई और सभ्यता बरतनी चाहिए। अगर आप खुद जैसे तैसे खाते हैं तो कम से कम दूसरों की भावनाओं, स्तर तथा इज्जत का ख्याल अवश्य करें। 
इसलिए जरूरी है खाना और खिलाने के स्तर को बनाये रखने की मगर कैसे? यही सवाल शायद आप पूछ रहे होंगे। तो आइए हम बतायें खाना खाने और खिलाने के कुछ तौर तरीके-
*  आप खाना परिवार के सदस्यों को खिलायें या मेहमानों को, खिलायें तो सलीके से ही वरना जैसे तैसे खिलाकर आप अपनी असभ्यता ही  प्रदर्शित करेंगे। आप खाना जमीन पर खिलायें या टेबल पर लेकिन भोजन परोसने से पूर्व उस जगह की सफाई अवश्य कर लें। ऐसा नहीं करने पर खाना कितना भी अच्छा क्यों न बना हुआ हो, उसका मजा तो बिलकुल ही नहीं मिल सकेगा क्योंकि सफाई में और गन्दगी में खाने का असर दिमाग पर अलग अलग पड़ता है। 
* प्राय: ऐसा देखने में आता है कि खाना तो लोग टेबल पर परोस देते हैं लेकिन पानी देना भूल जाते हैं। कुछ लोग तो ऐसा जानबूझ कर करते हैं। बच्चों के साथ तो ऐसी बातें होती ही रहती हैं। बड़े लोगों के साथ भी ऐसी बातें अक्सर होती रहती हैं जो उचित नहीं कही जा सकती, इसलिए खाना खिलाने के क्र म में पानी देना न भूलें। 
*  खाना खिलाते समय संकोच न बरतें। मेहमानों को तो खाना ठीक से खिलायें ही लेकिन जबरदस्ती न करें। कभी-कभी तो ऐसा देखा जाता है कि कुछ लोग खाना तो परोस देते हैं और खुद कहीं गायब हो जाते हैं। ऐसे में खाने वाले ठीक से खा भी नहीं पाते। 
*  कुछ लोगों को देखा जाता है कि खाना एक ही थाली में परोस देते हैं चाहे वह परिवार का सदस्य हो या मेहमान। ऐसा बर्तनों की कमी के कारण तो किया जा सकता है लेकिन बर्तनों के रहते हुए इस ढंग से कोई खाना खिलाये तो इसे नादानी ही माना जायेगा। 
*  कभी-कभी ऐसा भी देखा जाता है कि मेहमानों के आने पर परिवार के ही कुछ सदस्य जब साथ खाने बैठते हैं तो उन्हें कुछ न देकर कह देते हैं जो कुछ लेना है, आकर ले जाओ। ऐसा कर मेहमानों के समक्ष उस व्यक्ति की उपेक्षा तो होती ही है, साथ ही वे भी मेहमानों की नजरों में असभ्य प्रतीत होते हैं। अगर यही बर्ताव आप के साथ भी किया जाये तो कैसा लगेगा। 
* कुछ लोगों को देखा जाता है कि वे खाना तो टेबल पर परोस देते हैं लेकिन खाने के बाद बर्तन ले जाना भूल जाते हैं। इसलिए भुलक्कड़ बनने की कोशिश न करें।
*  कई लोगों को देखा जाता है कि अपने घर में खाने के बाद थाली  में ही हाथ मुंह धोकर पानी गिरा देते हैं और थाली को पानी से भर देते हैं। ऐसा करने से घृणा तो बढ़ ही जाती है, साथ ही थाली उठाकर ले जाते समय पानी जमीन पर भी गिर जाता है। इसलिए यदि मेहमानों का भोजन हो तो खाने के बाद हाथ मुंह बेसिन में ही धोयें तो अच्छा रहेगा। यह सभ्यता की निशानी है।
* अन्त में, एक बात का ध्यान अवश्य रखें। मेहमान अगर खा रहे हों तो खाने के बाद हाथ मुंह पोंछने के लिए तौलिया अवश्य रखें ताकि उन्हें रूमाल न निकालना पड़े। हो सके तो नेपकिन होल्डर में नेपकिन रखें।

(उर्वशी)
-सुधीर कुमार सिन्हा ‘मुरली’