वायु प्रदूषण की गम्भीर समस्या : ठोस प्रयासों की ज़रूरत


एक बार फिर राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पंजाब सहित 6 राज्यों को कड़ा नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि निश्चित समय तक उपरोक्त राज्य वायु प्रदूषण संबंधी कार्य योजना तैयार करें और इससे भी आगे यह चेतावनी दी गई कि यदि समय पर यह योजना तैयार नहीं की गई तो इन राज्यों को पर्यावरण मुआवज़ा देना पड़ेगा। ट्रिब्यूनल की ऐसी टिप्पणी इन राज्यों की कारगुज़ारी पर प्रश्नचिन्ह लगाती है। यदि आज राज्य इतने ही लापरवाह हो चुके हैं कि बेहद गम्भीर हो चुके इस मुद्दे के बारे में गम्भीरता से योजनाबंदी करने से असमर्थ हैं, तो इससे समाज किस तरह गिरावट की ओर जायेगा, इसका अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है। पहले भी हम अनेक बातों पर पिछड़ चुके हैं, समाज एक निश्चित दिशा की ओर बढ़ता नज़र नहीं आ रहा, अपितु बिखराव और दिशाहीनता बढ़ती जा रही है। इस बार जिन राज्यों का नाम ग्रीन ट्रिब्यूनल ने लिया है, उनमें असम, झारखंड, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और नागालैंड के साथ-साथ पंजाब का नाम भी दर्ज किया गया है। पंजाब के संबंध में इस दिशा में अनेक ही बेहद गम्भीर और महत्वपूर्ण योजनाओं को पूर्ण नहीं किया जा सका। केन्द्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में एक निश्चित समय के लिए ज़रूरतमंदों के लिए मनरेगा योजना शुरू की थी। हमारे अनुमान के अनुसार इसका सबसे बुरा हाल पंजाब में हुआ है। ज़रूरतमंदों और बेरोज़गारों को काम देने की इस योजना में भी भ्रष्टाचार का प्रसार हो गया है। यहां यह योजना अपने पूरे लक्ष्य तय करने से पिछड़ गई है और आधी-अधूरी रहकर दम तोड़ रही प्रतीत होती है। रोज़गार के लिए ऐसी योजना में भी यदि भ्रष्टाचार का बोलबाला हो और इसको महज़ खानापूर्ति ही बना दिया गया हो, तो यह राज्य के गिरावट की ओर जाने का लक्षण है। दूसरी बात पानी के लगातार गिरते जा रहे स्तर की ली जा सकती है। केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने गत लगभग दो दशकों से राज्य सरकार को भूमि निचले जल की दशा को सुधारने और इस संबंध में बड़े प्रयास करने के कड़े निर्देश दिए हैं, परन्तु राज्य सरकार द्वारा इन पर थोड़ा भी अमल नहीं किया गया। इसीलिए आज पंजाब के अधिकतर क्षेत्र डार्क ज़ोन ऐलान कर दिए गए हैं, जिसका तात्पर्य है कि यहां का जल धरती के नीचे नहीं, अपितु पाताल में पहुंच गया है। जहां तक देश का संबंध है, गत दिनों यह बात ‘ग्रीन पीस एण्ड एयर विजुअल’ द्वारा प्रसारित की गई। रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में से एक है। रिपोर्ट के विस्तार में यह भी कहा गया है कि दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में से 22 भारत में, 5 चीन में, 2 पाकिस्तान में और 2 बंगलादेश में हैं तथा यह भी बताया गया कि गत समय के दौरान चीन के प्रदूषण के स्तर में 12 प्रतिशत कमी आई है। वायु प्रदूषण के संबंध में आज दुनिया भर में बेहद चिन्ता की लहर दौड़ चुकी है। संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण मंत्रालय की एक जानकारी के अनुसार हर वर्ष 70 लाख लोगों की मौत समय से पूर्व हो जाती है, जिनमें 6 लाख बच्चे भी शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 6 अरब के लगभग लोग इतनी प्रदूषित वायु में सांस लेते हैं कि उनका जीवन और स्वास्थ्य हमेशा खतरे में घिरे रहते हैं। इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि हर घंटे प्रदूषण भरी वायु के कारण 800 लोग मर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अशुद्ध वायु मनुष्य के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। नि:संदेह आज देश के लिए यह बेहद चिंता का विषय होना चाहिए। इसके प्रत्येक स्तर पर सचेत होने की ज़रूरत है। इसके लिए संबंधित राज्यों की ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। 

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द