गरीबों को कब नसीब होगा पौष्टिक आहार ?


जैसा कि सभी को पता ही है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। लेकिन अब यह सब कुछ सिर्फ सुनने में और कहीं दीवारों पर लिखा हुआ ही अच्छा लगता है। देश में करोड़ों लोग ऐसे हैं जो गरीबी रेखा से नीचे हैं और अपने दिन की शुरुआत रोटी-गुड़ खाकर करते हैं, उनको नाश्ते का अर्थ ही नहीं पता है। मोदी जी खुद अब तक इतनी यात्राएं कर चुके हैं, लेकिन उनका कोई लाभ नहीं हुआ। अगर हुआ भी हो तो वह सिर्फ देश को, लेकिन ये सब चीज़ें ़गरीबों के विचारों से काफी दूर हैं। मोदी सरकार चाहे लोगों का विश्वास पाकर सत्ता में फिर से आई है, लेकिन वह राष्ट्र के गरीबों को कोई पौष्टिक भोजन नहीं उपलब्ध करवा रही। सोशल मीडिया के इस तेज रफ्तार ज़माने में सरकार को तो गांव-गांव जा कर वहां के हाल के बारे में जानना चाहिए। आज के समय में एक तो बेरोज़गारी की कमी के कारण लोगों को जो सस्ता मिलता है, वह खा लेते हैं, क्योंकि पौष्टिक भोजन खाने के लिए उनकी जेब में पैसे नहीं होते। इसलिए देश में तरह-तरह की बीमारियों का चलन होता है, और मृत्यु दर में भी बढ़ावा होता है। इसलिए मोदी सरकार को थोड़ा नहीं बल्कि ज्यादा ़गरीबों के हित के बारे में सोचना चाहिए ताकि उनको अच्छा स्वस्थ भोजन उपलब्ध हो सके। अगर देश में गरीब लोगों को पौष्टिक भोजन नहीं मिलेगा तो ऐसे बड़े-बड़े प्रोजैक्टों का कोई लाभ नहीं।