डेंगू का सफल इलाज है बचाव




मौसम परिवर्तन के कारण मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियां जैसे मलेरिया, डेंगू व चिकनगुनिया आदि के मामलों में भारत भी पीछे नहीं रहा। भारत में बढ़ते तापमान, बारिश की प्रकृति में परिवर्तन जैसे कभी हल्की, तो कभी भारी, मौसम-बेमौसम बरसात और आर्द्रता के कारण ये संक्रमक बीमारियां फैलती जा रही हैं। जहां एक ओर बारिश की तीव्रता मच्छरों के प्रजनन में सहायक होती है वहीं दूसरी ओर आर्द्रता के साथ बढ़ते तापमान इसके पनपने में मददगार साबित होते हैं। इस तरह ये व्यस्क मच्छर का स्वरूप ले लेते हैं और फिर बीमारियां फैलाने की इनकी क्षमता कई गुणा बढ़ जाती है।
कारण और प्रभाव
डेंगू एक संक्रामक बीमारी है जो कि मादा एडिस एजिप्टि मच्छर के काटने से फैलती है।
इस बीमारी के आरम्भिक लक्षण हैं :
स्नअचानक तेज बुखार।
स्नशरीर में रैशेज, तेज सिर दर्द।
स्नआंखों के आस-पास दर्द।
स्नमांसपेशियों व जोड़ों में दर्द आदि।
स्नजोड़ों में ज़बरदस्त दर्द होने के कारण उल्टी आना, भूख न लगना आदि इसके सामान्य लक्षण हैं।
डेगूं के लिए अभी तक कोई विशेष दवा इलाज नहीं है। इसलिए निम्नलिखित बातों पर ज्यादा ध्यान दें:-
स्नघर या दफ्तरों में मच्छरों को पनपने न दिया जाए तो मच्छरों के सम्पर्क में आने से खुद को बचाना चाहिए।
स्नडेंगू की प्रभावी तरीके से रोकथाम के लिए विभिन्न वर्गों के बीच आपसी तालमेल व सामुदायिक जागरूकता ज़रूरी है।
स्नऐसे लोगों को आराम करना चाहिए, अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए व डाक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
स्नघर के  अंदर की सफाई के साथ-साथ आस-पास की सफाई का भी ध्यान रखना ज़रूरी है। नमीयुक्त जगहों, जैसे-बेसिन, रसोईघर की नाली व बर्तन धोने के स्थान को साफ रखें।
स्नफूल के गमलों का पानी सप्ताह में कम से कम एक बार बदलें और जिन बर्तनों में पानी रखा हो, उनके ढक्कन अच्छी तरह बंद कर दें।
स्नएयर कूलर व फ्रिज को साफ रखें व उनका जमा हुआ पानी निकालते रहें।
स्नबैरल व ड्रम में जमा किए हुए पानी को सप्ताह में एक बार नए पानी के साथ बदल दें।
स्नपानी की टंकियां, जो भवनों में लगी होती हैं, उसे अच्छी तरह कस कर बंद करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
स्नबेकार पड़ी चीज़ें जैसे- टायर, नारियल के छिलके, बोतल इत्यादि को या तो फैंक दें या नष्ट कर दें।
स्नपानी के फव्वारों को हफ्ते में एक दिन सुखा देना चाहिए।
स्नज़मीनी कुओं की अच्छी देखभाल करनी चाहिए, ताकि इनमें मच्छर न पनपने पाए।
स्नछतों व छज्जों पर जमा बारिश के पानी को हफ्ते में एक बार साफ करना चाहिए।
स्नकीटनाशकों का इस्तेमाल करना चाहिए।
स्नचूंकि डेंगू के मच्छर दिन में ही काटते हैं, इसलिए नमीयुक्त जगहों पर रहने से बचें।