सदाचारी रहने के कुछ नियम


प्रात: जल्दी उठना, रात को जल्दी सोना, सैर करना, व्यायाम करना दांतों व शरीर की स्वच्छता बनाए रखना, सदा साफ़ वस्त्र पहनना, सदा सुपाच्य आहार लेना आदि नियमों व जरूरी बातों के अतिरिक्त कुछ और बातें हैं, जो हमें सदाचारी व निरोग बनाती हैं। आइए, कुछ बिंदुओं पर चर्चा करें -
*  ब्लेड, रेजर, तौलिया, पोशाक, बिस्तर, ब्रश, कंघा, चादर आदि अपने ही प्रयोग में लाएं, दूसरों के कभी नहीं।
*  कोई भी फल, सब्जी, बर्तन पहले धोएं, फिर प्रयोग में लाएं। 
*  कान के पर्दे कोमल होते हैं। नुकीली चीज़ से आघात न पहुंचाएं।
* त्वचा पर खारिश होती हो तो पानी में डिटोल मिलाएं। फिर स्नान करें। डिटोल की कुछ बूदें ही काफी रहेंगी। कभी-कभी नींबू की बूंदें पानी में डालें। फिर स्नान करें। खुरदरा तौलिया प्रयोग करें।
*  जहां-तहां थूकने से गंदगी होती है। रोग का डर रहता है। इससे असभ्यता झलकती है, सो अलग।
* पूरी तरह सीधे या उल्टे नहीं सोना चाहिए। करवट लेकर सोएं। 
*  तेज़ रोशनी से अंधेरे में, तथा अंधेरे से तेज़ रोशनी में एक दम कभी न आएं। इसका आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
* जब किसी के सामने जम्हाई लेनी पड़े, खांसना पड़े, छींकना पड़े तो मुंह के सामने हाथ, रूमाल आदि रखना न भूलें।
* मुंह में उंगली डालना, तिनका या पिन से कान खुजलाना अशिष्टता होती है।
- गर्दन झुका कर या लेट कर पढ़ना-लिखना ठीक नहीं।
* यदि कोई शारीरिक कष्ट हो जाए तो अधिक शोर न करें।
* नींद कम आए तो कारण व निवारण की सोचे, गालियों का सहारा न लें। अपना हित सोचते वक्त किसी अन्य का बुरा न सोचें।
इन कुछ बातों का पालन कर हम सदाचारी बनेंगे और हमें निरोगता प्राप्त होगी।

(स्वास्थ्य दर्पण)
-सुदर्शन भाटिया