वफादारी......


गर्मी का मौसम था। चमेली नामक डॉगी कल्लू की खाट के नीचे बैठी थी। सोना बकरी, बसंती गाय, वीरु बैल चारा खाने के बाद कुछ दूरी पर सो रहे थे। कल्लू मन ही मन लेटा-लेटा सोच रहा था-‘अब हमारा हिसाब-किताब सही जम जायेगा क्योंकि दो बच्चे सोना के होंगे, बसंती भी दो-चार दिन में बच्चा दे देगी, जिसका दूध बेचकर खेत खरीदेंगे। वीरु को भी अच्छा चारा खिला-पिला करके मेला में बेचकर घर बनवायेंगे। फिर यह झोंपड़ी मकान में बदल जायेगी। सभी जानवरों को मकान के अंदर बांधेंगे ताकि चोरों का डर न रहे। इस प्रकार हमारे पास काफी ध्न हो जायेगा। रोशनी को गहने बनवा देंगे। अपने लाड़ले बेटे बंकू का अच्छे स्कूल में दाखिला करवा देंगे। इस प्रकार सोचता-सोचता कल्लू कब सो गया उसको पता ही नहीं चला। चमेली भी गहरी नींद में सो गई थी। रात के बारह बज रहे थे कि दूर बंधे बसंती और वीरु को चोरों ने खूंटों से खोलकर अपने कब्जे में कर लिया था और घने जंगल की ओर तेज रफतार से लिये जा रहे थे। अचानाक सोना की आंख खुली तो उसने मैं-मैं-मैं करके मिमियाने लगी तो आवाज सुनकर चमेली की आंख खुल गई। वह भौंकती हुई सोना के पास पहुंची। बसंती और वीरु का खूंटा सूंघकर और जोर-जोर से भौंकने लगी और दौड़कर अपनी मालकिनी रोशनी के पास पहुंची और उसकी साड़ी का पल्लू खींचकर जगाने की कोशिश करने लगी तो रोशनी की एकदम आंख खुली और उसने देखा कि चमेली इतनी रात को जोर-जोर से क्यों भौंक रही है और मेरी साड़ी का पल्लू क्यों खींच रही है। उसने देखा कि चमेली उसकी साड़ी को खींचकर आगे वीरु और बसंती के खूंटों के स्थान पर ले जा रही थी। जब रोशनी ने वहां पर देखा कि वीरु और बसंती अपनी जगह नहीं हैं तो रोशनी जोर-जोर से रोने लगी और रोने की आवाज सुनकर कल्लू जाग कर उसके पास आ गया। वीरु और बसंती के गायब होने की बात सुनकर कल्लू घबरा गया किन्तु चमेली अपने कर्तव्य को पूरी तरह निभाये जा रही थी। वह जमीन को सूंघती-सूंघती दौड़ी चली जा रही थी और उसके पीछे कल्लू और गांव के अन्य लोग भी चमेली के पीछे-पीछे दौड़े चले जा रहे थे।  काफी दूर जाकर जब चोरों को चमेली के भौंकने की आवाज और गांव वालों के दौड़ने की आवाज सुनी तो चोर ठिठक गये और वीरु और बसंती को छोड़कर भाग गये। तब तक चमेली और कल्लू के बहुत से साथी वीरु और बसंती के पास पहुंच गये। बसंती और वीरु भी कल्लू को देखकर खुशी से रंभाने लगे और कल्लू भी उनको पाकर खुश हो गया।सभी लोग चमेली की तारीफ  करने लगे। कल्लू ने चमेली को खुशी से गोद में उठा लिया और मन ही मन सोचने लगा कि देखो जानवरों में कितनी वफादारी होती है। चमेली की वफादारी और बहादुरी से आज अपने बसंती और वीरु बच गये।

(सुमन सागर)