कैरीबैग के अलग पैसे मांगने की व्यवस्था उपभोक्ता कानून में नहीं


जालन्धर, 20 सितम्बर (शिव शर्मा): प्लास्टिक के लिफाफों पर पाबंदी के बाद अब प्रदूषण मुक्त लिफाफे होने के नाम पर बाज़ार में कई प्रकार के लिफाफे आ गए हैं जिनके कई लोग तो ग्राहकाें को सामान के साथ कैरीबैग देने के उसके अलग तौर पर पैसाें की मांग करते हैं। कई बार इस प्रकार के मामलों में देखने को मिला है और लोगों द्वारा सामान खरीदने के बावजूद उन्हें कैरीबैग के अलग पैसे मांगने पर एतराज़ करते देखा गया जबकि कई लोगाें ने तो मार्का वाली कम्पनियों को ही उपभोक्ता कानून का पालन करवाने के लिए बने राज्य आयोगों में भी इन मामलों को ले जाकर हर्जाना हासिल किया है। वैसे प्लास्टिक के लिफाफाें पर पाबंदी लगने से पहले ही कई लोग ग्राहकाें को सामान तो बेचते हैं परंतु उन्हें सामान डालने के लिए अलग तौर पर पैसे देने की मांग करते हैं। कई लोग तो चुपचाप अलग तौर पर कैरी बैग के पैसे दुकानदारों को दे देते हैं परंतु कई लोग जब इसके खिलाफ उपभोक्ता कानूनों की रक्षा करने के लिए बने आयोग में मामले ले जाते हैं तो पैसे मांगने वालों को भारी जुर्माने लगने के मामले सामने आए हैं। उपभोक्ता फोरम के प्रीजीआईडिंग फोर्म के पूर्व सदस्य सुरिंदर मित्तल इस बारे बताते हैं कि ग्राहक को एक तो सामान बेचना और अलग से किसी भी प्रकार से पैसे नहीं मांगे जा सकते। उपभोक्ता कानून में इस काम को कम्पनी की सेवा में कमी बताया जाता है और यह काम पूरी तरह गलत है। मित्तल ने कहा कि दुकानदार सामान बेच रहा है तो सामान को लिफाफे में डालकर देना उसका फज़र् है और कोई ग्राहक हाथ में सामान नहीं लेकर जाएगा।