असम में उग्र प्रदर्शन की मुख्य वजह


बंगाली बहुल बराक वैली को छोड़कर असम के शेष सभी हिस्से में मूल निवासियों इस बात को लेकर आशंकित हैं कि कानून बदलने के बाद बांग्लादेश से आए हिंदुओं को नागरिकता मिल जाएगी और तब ये बांग्लादेशी हिंदू उनके (असम के मूल निवासियों के) हितों को चुनौती देंगे। इन बांग्लादेशी हिंदुओं से उनकी संस्कृति, भाषा, परम्परा, रीति-रिवाजों पर असर पड़ेगा। साथ ही, राज्य के संसाधनों का बंटवारा भी करना पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि असम ने 1951 से 1971 तक आए शरणार्थियों का बोझ उठाया। देश के दूसरे किसी राज्य में इतनी भारी संख्या में शरणार्थी नहीं आए। इसलिए असम शरणार्थियों का अब और बोझ नहीं उठा सकता। प्रदर्शनकारियों को मोदी सरकार पर भरोसा नहीं है और बिल से असम अकॉर्ड के प्रावधानों को ठेस पहुंचेगा।