प्यार व भावुकता का सुमेल है ‘सुफना’


जालन्धर, 14 फरवरी (हरविंदर सिंह फुल्ल):  ज़िंदगी सपनों में जीने का नाम नहीं, अपनी मेहनत व हिम्मत से कुछ बनकर समाज में अपना नाम बनाने के लिए सफलता की रोमांचक कहानी है फिल्म ‘सुफना’।  जालन्धर-अमृतसर मार्ग पर स्थित सरब मल्टीप्लैक्स में प्रदर्शित निर्माता गुरप्रीत सिंह व नवनीत सिंह विर्क द्वारा पंज पानी के बैनर तले रिलीज़ फिल्म सुफना में दिखाया गया है कि मां-बाप के बिना बच्चे की ज़िंदगी कैसे दूभर हो जाती है, खास कर जब बच्चा लड़की हो। फिल्म शुरू होती है तेग (तानिया) के सुफने से जो अपने फौजी पिता के आने की उम्मीद लगाए बैठी है। फिल्म में दिखाया गया है कि एक अच्छे भविष्य की उम्मीद तंगी-परेशानियां झेलकर भी तेग अपने पालनहार ताया की पगड़ी को दाग नहीं लगने देती। फिल्म में पाखंडपुणे पर भी लेखक व निर्देशक जगदीप सिद्धू ने करारी चोट करते हुए दिखाया है कि मेहनत व हिम्मत के बिना कोई समस्या हल नहीं होती। जगजीत सिंह उर्फ जीता (ऐमी विर्क) जोकि टूनों से ही प्यार पाने व ज़िंदगी को जीने की कोशिशें करता है को जब यह बात समझ लग जाती है कि तब तक बेहद देर हो जाती है। जीता को अपना प्यार पाने के लिए क्या कुछ करना पड़ता है। तेग जीता को प्यार पाने के लिए क्या कहती है। जीता व तेग के सुफने सच होते हैं या नहीं, यह तो फिल्म देखने पर ही पता चलता है। फिल्म प्यार व भावुकता का सुमेल है। फिल्म में कामेडी अपने आप उपजती है न कि उसे ठोसा गया। फिल्म साफ सुथरी है और इसे हर वर्ग का व्यक्ति परिवार के साथ बैठकर देख सकता है। फिल्म का गीत संगीत दर्शकों के मन को भाता है। ऐमी विर्क व तान्या की खूबसूरत जोड़ी ने बढ़िया अभियन कर दर्शकों का मन मोह लिया है।