मुरलीधरन की बायोपिक पर हंगामा क्यों है ?

तमिल मूल के श्रीलंकाई क्रिकेटर मुथैया मुरलीधरन के करीबी रिश्तेदार व दोस्त चाहते थे कि उनके शानदार क्रिकेट कॅरियर को सिल्वर स्क्रीन पर उकेर दिया जाए ताकि हमेशा के लिए एक ऐसी यादगार बन जाए जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहे लेकिन शुरू में मुरलीधरन अपनी बायोपिक के लिए तैयार नहीं थे, शायद इस वजह से कि उन्हें अपने जीवन पर बनने वाली प्रस्तावित फिल्म का अपने कॅरियर की तरह विवादित होने का अंदेशा था। गौरतलब है कि अपने लम्बे सफल क्रिकेट करियर में मुरलीधरन को अपने गेंदबाजी एक्शन के कारण अनेक विवादों व टैस्टों से गुजरना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया के एक अम्पायर ने तो उनके एक्शन को रिपोर्ट करने की बजाय उनकी गेंदों को टैस्ट के दौरान ही ‘नो बॉल’ घोषित किया और भारतीय लीजेंड बिशन सिंह बेदी ने तो मुरलीधरन की गेंदों को ‘भट्टा’ कहते हुए उन्हें कभी गेंदबाज नहीं माना। लेकिन अनेक बायो-टैस्टों के आधार पर आईसीसी ने माना कि मुरलीधरन के हाथ की प्राकृतिक बनावट के कारण उनकी कोहनी गेंद करते समय 15 डिग्री की निर्धारित सीमा से अधिक मुड़ती है, इसलिए उन्हें गेंदबाजी करने की अनुमति दे दी गई और वह टैस्ट क्रिकेट में 800 विकेट लेने वाले विश्व के एकमात्र खिलाड़ी बन गये। खैर! बाद में मुरलीधरन ने सोचा कि उनकी बायोपिक सही अवसर है अपनी सफलता में अपने पेरेंट्स, अध्यापकों, कोचों और साथी खिलाड़ियों के योगदान को स्वीकार करने के लिए लेकिन जैसे ही 8 अक्तूबर, 2020 को मूवी ट्रेन मोशन पिक्चर्स व डार मोशन पिक्चर्स ने फिल्म ‘800’ का आधिकारिक फर्स्ट-लुक पोस्टर जारी किया, जिसमें विख्यात तमिल एक्टर विजय सेथुपथी मुरलीधरन की भूमिका में है, तो जैसा कि अंदाज़ा था, जबरदस्त राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया। पीएमके के संस्थापक एस रामदास ने कहा, ‘मुरलीधरन तमिल समुदाय का विरोधी है, विजय सेथुपथी को भी विरोधी समझा जाएगा, अगर वह फिल्म में मुरलीधरन की भूमिका निभाता है।’ मुरलीधरन विवादों के लिए अजनबी नहीं हैं, इस नये विवाद में अंतर सिर्फ  इतना है कि यह उनके गेंदबाजी एक्शन को लेकर नहीं है बल्कि राजनीतिक है। दरअसल, मुरलीधरन को श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का समर्थक समझा जाता है जोकि लगभग 30 वर्ष के गृहयुद्ध के दौरान अधिकतर समय श्रीलंका में सत्ता संभाले हुए थे। मुरलीधरन का कहना है कि गृहयुद्ध के शुरू होने पर भारतीय-मूल के मलयागा तमिल सबसे पहले व सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। वह बताते हैं, ‘गृहयुद्ध के कारण जो दर्द व हिंसा हुई उसका मुझे व्यक्तिगत अनुभव है। श्रीलंका में लगभग 30 वर्ष तक गृहयुद्ध चला और इन कठिन स्थितियों में, मैं किस तरह से क्रिकेट टीम का हिस्सा बना और सफल हुआ, फिल्म 800 इस सबके बारे में है।’मुरलीधरन का आरोप है कि उनके बयानों को उनकी छवि खराब करने के लिए तोड़ मरोड़कर पेश किया गया। मुरलीधरन ने इन दावों का भी खंडन किया कि वह तमिल नहीं जानते। वह कहते हैं, ‘श्रीलंका में अल्पसंख्यक होने के नाते मैं हीनभावना से ग्रस्त था। यह तथ्य है और ऐसा होना स्वाभाविक भी है, खासकर जब मेरे पेरेंट्स की भी यही मानसिकता थी। मैं अपनी कड़ी मेहनत के कारण ही क्रिकेट टीम का अटूट हिस्सा बन सका।’ लेकिन अब मुरलीधरन श्रीलंकाई, मलयागा तमिलों व ईलम तमिलों में कोई अंतर नहीं करते हैं। वह अपनी ‘फाऊंडेशन ऑफ  गुडनेस’ के जरिये ईलम तमिलों सहित सबकी मदद करते हैं बिना किसी भेदभाव के। वह कहते हैं, ‘मुझे सिर्फ  इसलिए गलत समझा जाता है, क्योंकि मैं श्रीलंका की क्रिकेट टीम का हिस्सा था। अगर मैं भारत में पैदा होता तो भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा होता। क्या यह मेरी गलती है कि मैं श्रीलंकाई तमिल के रूप में पैदा हुआ। मुझे इससे दु:ख होता है।’फिल्म ‘800’ के निर्माताओं का कहना है कि फिल्म में कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं है। अगर होती भी तो भी इस महान क्रिकेटर के जीवन को बड़े पर्दे पर आने से नहीं रोकना चाहिए। संसार का एकमात्र गेंदबाज जिसकी झोली में 800 टैस्ट विकेट हैं, जिसने प्रति टैस्ट 6 विकेट लिए और जिसे खेलने में बड़े-बड़े बल्लेबाज घबराते थे, अगर उसका जीवन सिल्वर स्क्रीन पर नहीं आएगा तो फिर किसका आना चाहिए? इसलिए बेकार के राजनीतिक विवाद खड़े करने की बजाय एक शानदार कॅरियर का जश्न मनाना चाहिए।

-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर