न चीर, न फाड़, एक्युप्रेशर से होता है सफल उपचार


 

भारत में ‘एक्युप्रेशर’ का इतिहास बहुत पुराना है तथा इसका आधार प्रेशर यानी गहरी मालिश करना है। दबाव के साथ मालिश करने से रक्त का संचार ठीक होने लगता है जिसके फलस्वरूप शरीर की शक्ति एवं स्फूर्ति बढ़ जाती है। शरीर की शक्ति बढ़ने से अंगों में जमा अवांछनीय एवं विषपूर्ण पदार्थ पसीने व मल-मूत्र के रूप में शरीर से बाहर निकल जाते हैं और शरीर रोगमुक्त हो जाता है। शरीर के प्रत्येक अवयव का हथेलियों और  पैरों के तलवों से खास बिंदुओं का सीधा संबंध बताया जाता है। इसके अनुसार रक्त वाहिनियां तथा स्नायु संस्थान की समस्त छोटी-बड़ी नाड़ियों का आखिरी हिस्सा हथेलियों एवं तलवों में स्थित होता है। शरीर पंचतत्वों से निर्मित है जिसका संचालन शरीर की बिजली प्राण ऊर्जा करती है। जिसे ‘बॉयो-इलैक्ट्रिसिटी’ कहा जाता है।
पैरों, हाथों तथा शरीर के विभिन्न भागों पर स्थित जो केन्द्र दबाने से पीड़ा (दर्द) करते हैं, संबंधित अंगों की बिजली ‘लीक’ करती है जिसके फलस्वरूप संबंधित अंगों में किसी न किसी प्रकार का विकार आ जाता है। जब इन केन्द्रों पर प्रेशर (दबाव) दिया जाता है तो लीकेज बंद हो जाती है। लीकेज के बंद होने से शक्तिरूपी बिजली (प्राण-ऊर्जा) का संबंधित अंगों में प्रवाह सामान्य हो जाता है जिसके कारण रोग दूर हो जाते हैं। हाथ पैर के कुछ निश्चित बिन्दू शरीर के निश्चित अंगों के प्रतिनिधि होते हैं। हाथ या पैर के बिन्दुओं पर पहुंचाकर संबंधित अंगों की कार्य क्षमता में वृद्धि की जा सकती है। इससे वे रोगमुक्त हो जाते हैं।
पैरों के तलवों एवं हथेलियों में स्थित ज्ञान तंतु ढक जाते हैं जिससे शरीर की विद्युत चुम्बकीय शक्ति का भूमि के साथ सम्पर्क नहीं हो पाता है। दबाव के उपचार से ज्ञान तंतुओं के छोर पर हुआ जमाव दूर हो जाता है और शरीर की विद्युत चुम्बकीय तरंगों का पुन: मुक्त संचरण होने लगता है। एक्युप्रेशर पद्धति में शरीर को दो भागों में विभक्त किया गया है- दायां और बायां। पुन: दो भागों को पांच-पांच भागों में बांटा गया है। शरीर के जो अंग दायें भाग में स्थित है, उनकी जांच व उपचार के लिए दाईं तरफ ही बिन्दू पाये जाते हैं और जो अंग बायें भाग में स्थित हैं, उनके बिन्दू बाईं तरफ पाये जाते हैं। इस तरह कुल दस ज़ोन होते हैं। हाथ-पैरों की अंगुलियों को आधार मानकर ऊपर से नीचे की ओर रेखाएं खींची जाती हैं। इससे मालूम हो जाता है कि शरीर का कौन-सा भाग किस ज़ोन में पड़ता है और उसका संबंध हाथ-पैर के किस भाग से है। शरीर में स्थित प्राणशक्ति (ऊर्जा) हाथ की अंगुलियों एवं अंगूठों के सिरे तक जाती है। हथेली एवं तलवों के अलावा एक्युप्रेशर बिंदू शरीर पर निश्चित चैनल (नाड़ी) पर बिखरे हुए हैं जो रोगों के निदान के लिए उपयोगी होते हैं।