इराक में मारे गए युवकों के परिजनों ने लगाई गुहार- सरकार नौकरी देने का वादा पूरा करे



अजनाला, 11 जून (अ.स.): पिछले वर्ष इराक में रोज़ी रोटी कमाने गए पंजाब सहित हिमाचल प्रदेश, बिहार व पश्चिमी बंगाल के अपहरण कर आई.एस.आई.एस. आतंकवादी संगठन द्वारा बंधक बनाने के बाद मार दिए गए 39 भारतीय नागरिकों में से तहसील अजनाला व ज़िला अमृतसर के प्रभावित पांच परिवारों ने आज अजनाला में एक सुर होकर केन्द्रीय मोदी व प्रदेश कैप्टन सरकारों विरुद्ध गुस्सा निकालते हुए कहा कि पीड़ित परिवारों में से एक-एक सदस्य को बिना शर्त सरकारी नौकरी देने तथा नौकरी की व्यवस्था न होने तक 20 हज़ार रुपए प्रति माह गुज़ारा भत्ता देने के वायदे को उनके साथ पूरा करने से यह सरकारें कथित तौर पर भगौड़ी हो गई हैं जिसके रोष में शीघ्र ही चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री की कोठी के आगे व दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के कार्यालय समक्ष रोष धरने व प्रदर्शन देने के अतिरिक्त अन्य भी कोई सख्त कदम उठाया जा सकता है जिसकी सीधी ज़िम्मेवारी इन सरकारों पर होगी। ब्लाक अजनाला के गांव संगूआणा के इराक में आतंकवादियों के हाथों मारे गए निशान सिंह के भाई स. सरवन सिंह संगूआणा, तहसील अजनाला के गांव मानांवाला के मृतक रणजीत सिंह की बहन कुलबीर कौर, गांव सियालका के मृतक जतिन्द्र सिंह की माता रणजीत कौर, गांव जलाल उस्मा के मृतक गुरचरन सिंह की विधवा हरजीत कौर व मजीठा रोड अमृतसर के मृतक हरीश कुमार के भाई मुनीश कुमार आदि प्रभावित परिवारों ने भरे मन से कहा कि घरों की खुशहाली व परिवारों की आर्थिक स्थिति की मज़बूती के लिए रोज़गार/कामकाज़ करने के लिए घर से बेघर होकर विदेश इराक गए। संस्कार मौके पंजाब सरकार व उससे पहले उस समय की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने स्पष्ट किया था कि मृतकों के परिवारों के एक-एक सदस्य को बिना शर्त सरकारी नौकरी दी जाएगी तथा नौकरी मिलने तक प्रभावित परिवार को 20 हज़ार रुपए प्रति माह गुज़ारा भत्ता दिया जाएगा। 
प्रभावित परिवारों ने परेशान होकर व सरकारों के गुस्से का नज़ला झाड़ते आरोप लगाए कि उनके परिवारों को नौकरियां देने की बजाय विवाह होने व इंडीपैंडैंट रहने की नीति ठोस कर जहां कथित तौर पर जलील किया जा रहा है, वहीं जून 2018 से मिलती 20 हज़ार रुपए प्रति माह गुज़ारा भत्ता राशि भी बंद कर दी गई है।