बचें सुबह की भाग-दौड़ से


चाहे आप घरेलू महिला हों या कामकाजी महिला, सुबह का समय भागदौड़ का समय होता है। समय भी तेज़ रफ्तार से भागता जाता है। सुबह का नाश्ता, चाय, बच्चों और पति का टिफिन, दूध, बच्चों को तैयार कर स्कूल भेजना, पतिदेव के कपड़े निकालना और अगर आप कामकाजी हैं तो आपको अपनी तैयारी करना आदि।
* रात्रि में सोने से पहले बच्चों की स्कूल ड्रेस, पति के ऑफिस के पहनने के कपड़े और स्वयं कामकाजी होने पर अपने पहनने वाले कपड़ों का निर्णय कर निकाल कर एक निश्चित स्थान पर रख दें। बच्चों के मोजे, बेल्ट, टाई आदि भी साथ रख दें।
* बच्चों को सिखाएं कि स्कूल से आने पर बच्चे अपना बैग, बोतल और अपने कपड़े एक निश्चित स्थान पर रखें।
* रात्रि में सोने से पहले कपड़ों में बटन ठीक-ठाक हैं और प्रेस ठीक है या नहीं, जांच लें और आवश्यकता होने पर रात्रि में ठीक करके सोयें।
* बच्चों और पति को आदत डालें कि छोटे-छोटे काम स्वयं करें। आप पर अतिरिक्त बोझ न डालें। बच्चों को जब आप होमवर्क करवा रहे हैं तो साथ-साथ रात्रि का खाना भी देख लें। समय होने पर सुबह क्या बनाना है, इसका चयन कर थोड़ी तैयारी कर लें, जिससे सुबह आपका समय नष्ट नहीं होगा। होमवर्क समाप्त होने पर बच्चों को बैग पैक करने के लिए कहें। उन्हें पैंसिल रबड़ संभाल कर रखने को कहें और पैंसिल यदि शार्प करनी हो तो करवा कर पैंसिल बॉक्स में रखवायें।
* बच्चों और पति के टिफिन रात्रि में साफ कर पोंछ कर रख दें।
* प्रात: बच्चों के नाश्ते में क्या स्कूल ले जाना है, रात्रि में तय कर सोयें।
* रात्रि में टी.वी. देखते समय सब्जी और मसाले के लिए प्याज, टमाटर, अदरक, लहसुन काट कर रख लें।
* रात्रि में स्वयं भी समय पर सोयें और बच्चों को भी समय पर सोने की आदत डालें ताकि सुबह ताज़गी लिए उठें। 
* चाय पीते-पीते सब्ज़ी आदि का मसाला भून लें।
* गृहिणी होने पर कम महत्व वाले काम बाद में भी निपटा सकती हैं। कामकाजी होने पर छोटे-मोटे काम छुट्टी के दिन निपटाने का प्रयास करें। इस प्रकार सुनियोजित रहने पर सुबह के तनाव भरे वातावरण को सहज बनाया जा सकता है। (उर्वशी)
—सुनीता गाबा