बच्चें पर नज़र रखने की भी ज़रूरत


हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा खुश रहे और वह उनको हर हालात में खुश रखने की सारी सुविधाएं पेश करते हैं। लेकिन कहीं न कहीं उनके मन में यह डर बैठ जाता है कि कहीं बच्चे उनके द्वारा दी इन सुविधाओं का गलत फायदा न उठा लें। कारण आज के बच्चे समय से पहले ही बड़े हो जाते हैं। सोशल नेटवर्किंग ने बच्चों के जीवन को प्रभावित किया है और वह अपनी मुट्ठी में सारी दुनिया को लेकर घूम रहे हैं, जैसे उनको पूरी दुनिया का पता चल गया हो। ऐसे वातावरण में उन पर नज़र रखनी बहुत ज़रूरी है। आज के बच्चों को अच्छे-बुरे की पहचान नहीं है। 
उनको अपने हित और अहित का पता नहीं है। इसीलिए माता-पिता ही उनको सही रास्ते पर ला सकते हैं या फिर एक अच्छा शिक्षक। कुछ माता-पिता ऐसे भी हैं, जिनको सोशल साइट्स का तो पूरा ज्ञान है, लेकिन कुछ माता-पिता को कुछ भी नहीं पता होता। कई बार माता-पिता के पास बच्चे बैठे हों तो उनको पता नहीं होता कि बच्चे नेट पर क्या देख रहे हैं। इसीलिए कहते हैं कि जब बच्चे जवानी की दहलीज पर कदम रखते हैं तो माता-पिता की ज़िम्मेदारियां कई गुणा बढ़ जाती हैं। इस अवस्था में दुनिया के कई भूखे भेड़िये बच्चों को उनकी सपनों की दुनिया दिखाकर अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करते हैं। यहां माता-पिता की नज़र काम आती है।
किशोरावस्था जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिस पर आने वाला भविष्य निर्भर होता है। अगर बच्चा खुद इस समय में संभल जाए तो अच्छा या फिर माता-पिता उनको संभाल लें तो भी अच्छा है। ऐसा करने से उनको भविष्य में उन पर गर्व होता है। अगर वह गलत मार्ग पर चले जाएं तो जीवन बर्बाद हो जाता है। आज का युवा वर्ग नशों का शिकार हो रहा है। जोकि समाज के लिए अच्छी बात नहीं है। इन हालातों में माता-पिता को एक पहरेदार के रूप में काम लेना चाहिए और उनका रोल मॉडल बनना चाहिए। 
बच्चे सुनने से ज्यादा अपने माता-पिता के आचरण पर चलने की कोशिश करते हैं। माता-पिता को समय-समय पर उनके स्कूल-कालेज की गतिविधियों पर ध्यान रखना चाहिए और जानकारी लेते रहना चाहिए। उनके मित्रों से भी सम्पर्क रखना चाहिए। बच्चों के कमरे को समय-समय पर चैक करना चाहिए।
अगर बच्चा ज्यादा चुपचाप या अकेला रहना पसंद करे तो इसका कारण अवश्य पूछें। कभी-कभी बच्चे करियर को लेकर मन ही मन में घुटन महसूस करते हैं। ऐसे समय माता-पिता की निगरानी ही काम आती है। पी.जी. में रह रहे बच्चों के प्रति भी माता-पिता को सावधान रहना चाहिए। 
अगर माता-पिता सिर्फ अपने ही काम में व्यस्त रहेंगे और बच्चों पर ध्यान नहीं देंगे तो ऐसा करने से बच्चों से ज्यादा अपना नुक्सान करेंगे। विद्यार्थी जीवन मेहनत और संघर्ष का नाम है, बच्चों को हद से ज्यादा सुविधाएं भी नहीं देनी चाहिए कि वह जीवन में संघर्ष करना ही भूल जाएं। बच्चों पर नज़र रखना मतलब उनसे दोस्ताना व्यवहार करें। ताकि बच्चे आपसे बिना झिझक के बात को स्पष्ट 
कर सकें। 
बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा समय व्यतीत करें। अगर घर में बड़े हैं तो उनसे भी ज़रूर सीखना चाहिए। उनकी बातों को जीवन में उतारना चाहिए। बच्चे खिली हुई नवजात कली की तरह होते हैं, उनकी देख-रेख में कोई कमी नहीं छोड़नी चाहिए। हम जिस तरह से बच्चों का पालन-पोषण करते हैं, वह उसी प्रकार से खिलकर आगे भविष्य में हमारे सामने आते हैं। बस अगर ज़रूरत है बच्चों के भविष्य को संभालने की। ताकि वह आगे अच्छे नागरिक बन सकें।