ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रैस ने हिंदी, बांग्ला में रखा कदम, युवा लेखकों पर ध्यान 


नई दिल्ली, 7 जनवरी (भाषा):  ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (ओयूपी) पहली बार हिंदी और बांग्ला में रचनाएं प्रकाशित कर रही है और भारतीय भाषाओं में लेखन के लिए लेखकों विशेषकर युवाओं को जोड़ने पर ध्यान दे रही है। यह अकादमिक प्रेस भारत में हिंदी समेत अन्य भारतीय भाषाओं के बड़े पाठक वर्ग को ध्यान में रखते हुए भारतीय भाषा प्रकाशन कार्यक्रम (आईएलपीपी) शुरू कर रही है जिसके तहत सबसे पहले दो भाषाओं, हिंदी और बांग्ला में प्रकाशन और अनुवाद कार्य प्रारंभ किया गया है। कुछ साल के बाद अन्य भारतीय भाषाओं को भी इसमें जोड़ा जाएगा। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस के निदेशक डॉ सुगत घोष ने बताया कि इससे पहले तक नॉन-फिक्शन और अकादमिक कार्यों में केवल अंग्रेजी में प्रकाशन होने की वजह से एक बड़ा वर्ग हमसे दूर था और हमें लगता है कि छोटे केंद्रों में पाठकों को उनकी भाषा में गुणवत्तापरक विषयवस्तु पढने को मिलनी चाहिए। हमें लगता है कि यह काम हमें पहले शुरू कर देना चाहिए था। घोष ने भाषा से बातचीत में कहा कि इस कार्यक्रम के तहत प्रकाशित हिंदी की पहली छह और बांग्ला की आठ पुस्तकों के साथ दिल्ली में चल रहे विश्व पुस्तक मेले से शुरुआत हो रही है और देशभर में छोटे छोटे पुस्तक मेलों के जरिये भी हम पाठकों से संपर्क बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही हम नये लेखकों से भी संपर्क साध रहे हैं। घोष के अनुसार हम रोमिला थापर, आशुतोष वार्ष्णेय, आंद्रे बेते, रामचंद्र गुहा, माधव गाडगिल और माधव खोसला जैसे लेखकों की प्रसिद्ध किताबों का तो हिंदी में अनुवाद कर ही रहे हैं, साथ ही नान-फिक्शन और अकादमिक क्षेत्र में भारतीय भाषाओं में लेखन के लिए खासतौर पर युवा लेखकों से संपर्क कर रहे हैं।