मछली जो बिना पानी के भी जीवित रह सकती है



अधिकतर देखा गया है कि मछलियां बिना पानी के जीवित नहीं रह सकती। जैसे ही उन्हें पानी से बाहर निकाला जाता है, वो कुछ क्षण तक जीवित रहकर प्राण त्याग देती हैं। नदी, समुद्र या घरों में पाली जाने वाले सभी मछलियों के ये सामान्य लक्षण हैं। पानी मछलियों का जीवन है। पानी के बिना मछलियां मृतप्राय हो जाती हैं।
लेकिन संसार में कुछ ऐसी भी मछलियां पाई जाती हैं जो पानी के बिना जीवित रह सकती हैं। बिना पानी के जीवित रहने वाली मछलियां संघ कार्डेटा, उपसंघ वर्टीब्रेटा, अधिवर्ग नैथास्टोमैटा, वर्ग आस्टिक्थीइस, उपवर्ग एक्टिनाप्टेरिजाई के अंतर्गत आती हैं। ऐनाबस इसी तरह की एक मछली है। भारतीय नदियों में पाई जाने वाली इस मछली को आरोही पर्च कहते हैं। बंगाल में इसे ‘कोई’ के नाम से जाना जाता है।
ऐनाबस मछली का शरीर दीर्घायत, पार्श्वत: सम्पीड़ित होता है। इसकी लम्बाई लगभग 8 इंच होती है। पृष्ठ फिन एवं मुद्रा फिन पर कांटे पाए जाते हैं। पृष्ठ फिन एवं  मुदा फिन दोनों लंबे होते हैं। अंस फिन के पास श्रेणी फिन पाए जाते हैं। आंखें बड़ी होती है, शरीर के ऊपर बहुत से साइक्लाइड शल्क बने होते हैं।
पार्श्व रेखा टूटी-फूटी होती है। श्वसन अंग गिलों के सामने होते हैं। इनके ऊपर रक्तवाहिकामय श्लेष्म-झिल्ली होती है। इन्हें लैबिरिथ रूप अंग कहते हैं। ये अंग एक अधिगिल गुहा में रहते हैं। इन्हीं अंगों के कारण यह मछली हवा में भी सांस लेकर जीवित रह सकती है।
सामान्य मछलियों के विपरीत यदि इसे अधिक देर तक पानी में रखा जाए तो यह दम घुटने से मर भी सकती है। यह जब ज़मीन पर चलती है, तब इसकी ग्रसनी हड्डियों में थोड़ा-सा जल रहता है। आपर्कुलम कांटों के द्वारा यह ज़मीन पर चल फिर सकती है। (उर्वशी)
-सुनील परसाई