विश्व प्रसिद्ध है श्रीनगर की खूबसूरत डल झील


श्रीनगर की डल झील विश्व प्रसिद्ध झील है। श्रीनगर की समस्त खूबसूरती डल झील पर ही केन्द्रित है। यह डल झील प्राकृतिक पानी से बनी है। डल झील के भीतर लगभग 1300 झरने हैं, जो स्वयं भूमि से फूटते हैं, उन झरनों का समस्त पानी मिलकर डल झील की प्यास और मोहब्बत को चार चांद लगाता है। यह झील मानवता को, विश्व भाईचारे को, समस्त धर्मों को मुहब्बत का प़ैगाम देती है।
अगर जन्नत की खूबसूरती देखनी हो तो डल झील के क्षेत्र में देखी जा सकती है। डल झील अत्यंत सुंदर दृश्य बनाती है। चारों तरफ दूर-दूर ऊंचे बर्फीले चमकते पहाड़। डल झील बहुत ऊंचे लम्बे-चौड़े समतल पहाड़ पर अपना स्थान रखती है। इस का पवित्र पानी शीशे की भांति चमकता है, जैसे कुदरत ने कई मील लम्बा-चौड़ा दर्पण बिछा दिया हो, जिससे सारा आकाश झांकता नज़र आता है। यहां सुबह का मौसम इतना मर्मस्पर्शी होता है मानो कोई आध्यात्मिक सुकून रूह तक उतर गया हो। मौसम का आनंद शब्दों में बयान करना शायद मुश्किल हो। डल झील के इर्द-गिर्द कई भव्य बाग-बगीचे अत्यंत सुंदर इमारतें, मखमली सड़कें, साफ-स्वच्छ माहौल, ठंडी हवाएं और एक अलग किस्म की खुश्बू बिखरती है। डल झील की लम्बाई 6 किलोमीटर एवं चौड़़ाई तीन किलोमीटर है। इस झील में कई ऐसे द्वीप हैं जो पर्यटकों का मन मोह लेते हैं। इस झील में अनेक तैरते होटल, शिकारे तथा हाऊस बोट उपलब्ध हैं जिन्हें देखकर ऐसा लगता है यह झील ही जन्नत है। हाऊस बोट और शिकारे पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र हैं। यह हाऊस बोट और शिकारे डल झील जेहलम नदी एवं नगीन झील में तैरते दिखाई देते हैं। यहां के व्यापारी अपने शिकारों में ही सामान डाल कर बेचने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर आते-जाते हैं। यह हाऊस बोट होटलों की तरह काम करते हैं तथा इनमें पर्यटकों के रहने, खाने-पीने की संपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध हैं।
हाऊस बोट एक लम्बी-चौड़ी किश्ती में होटलनुमा स्थान होता है। बोट (किश्ती) को खूबसूरती से संवारा गया होता है। एक आलीशान होटल की समस्त सुविधाएं इस में होती हैं। झील के छोर पर अनेकानेक हाऊस बोट मिलते हैं। इनमें बैडरूम, बाथरूम, स्नान घर, टी.वी. फोन आदि सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। अनेक फिल्मों की शूटिंग यहां हुई है और होती है। हाऊस बोट का किराया, इसके स्थान साज-सज्जा और सुविधाओं पर निर्भर होता है। फिर भी कम से कम तीन हज़ार रुपए में एक दिन के लिए अच्छा हाऊस बोट मिल जाता है। सस्ते हाऊस बोट भी मिल जाते हैं। हाऊस बोट में रहने का मज़ा अपनी अलग पहचान का होता है।  डल झील में कुछ सूखी जगह है। जिसमें खाने-पीने का सामान मिलता है। यहां चार चिनारों के वृक्ष हैं। इसलिए इस स्थान को चार चिनार कहते हैं। बोट से यहां तक जाने-आने का भी अपना ही सुखद आनंद है।
पहले ब्रिटेन के लोगों को कश्मीर की धरती पर रहने का अधिकार नहीं था। इसलिए इन हाऊस बोटों का आविष्कार हुआ। बाद में उन्होंने 1888 में झीलों पर रहने के लिए इनमें सुधार किया। ये हाऊस बोट, शिकारे, डल झील, जेलम नदी तथा नागिन झील में तैरते हैं। डल झील के मध्य भाग ‘लोकुण्डल’ जिसे रूप लंक के नाम से जाना जाता है में स्थित है। यह द्वीप चारों तरफ पानी से घिरा हुआ है, जिस पर चार चिनार के विशाल वृक्ष हैं। यह स्थान दूर-दूर के सुंदर दृश्य दिखाता है। यहां के दृश्य देखने और फोटोग्राफी करने का अपना ही मजा है। डल झील का पानी गर्मियों में ठंडा तथा सर्दियों में गर्म रहता है। शाम को हाऊस बोट की बालकानी में या छत पर बैठ कर झील का आनंद लेने का अपना अलग आनंद होता है और इसे आप कभी नहीं भूल सकते।
सूर्य अस्त का दृश्य तो इस झील पर देखने के लायक होता है। इस सुंदर दृश्य का अनुभव करने के लिए आपको इस झील के किनारे शाम को 6 से 7 बजे तक आना पड़ेगा, शाम को इतने सुंदर दृश्य देखेंगे कि आप तमाम उम्र याद रखेंगे। यह दृश्य देखने के लिए आप को नेहरू पार्क से निशांत बाग तक सड़क के किनारे -किनारे चलकर आना होगा। डल झील पर बहुत से स्थानीय निवासी भी रहते हैं और उनका सारा जीवन इसी झील पर व्यतीत हो जाता है। इस झील के बीच  दुकानें भी हैं जहां से आप जीवन की प्रत्येक वस्तु खरीद सकते हैं। कश्मीर कला की बहुत-सी वस्तुएं जैसे कश्मीरी शालें, कालीन, शुद्ध केसर, दुकानदार शिकारे में भरकर हाऊस बोट तक आ जाते हैं। डल झील के इर्द-गिर्द अनेक स्थान देखने को मिलते हैं। यहां पर सेब, अखरोट, चैरी, बादाम तथा विशेषतौर पर शुद्ध केसर मिलता है। फूलों की फसल भी बहुत होती है।   डल झील के छोर पर ही है नेहरू उद्यान। यह उद्यान जवाहर लाल नेहरू की याद में डल झील के किनारे बनाया गया है जिसमें शिकारे व मोटर बोट के साथ-साथ खाने-पीने के लिए रेस्टोरेंट भी उपलब्ध हैं। इस उद्यान में रात के समय जो रोशनी होती है जो पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केन्द्र होती है। चांदनी रात में डल झील दुल्हन की भांति अलंकरित होती है। पानी में जैसे दुल्हन-सा चांद निकल आया हो। सुहानी चांदनी रातें दिल का चैन चुराती हैं और डल झील है खूबसूरत धरती का स्वर्ग।