फिट रहने का अब भी सब से बढ़िया रास्ता हैआऊटडोर गेम्स


आज की भागदौड़ भरी जिन्दगी में हमारे लिए अपने स्वास्थ्य को सही रखना एक चुनौतीपूर्ण काम बन गया है। यही वजह है कि आजकल एक्सरसाइज, योग, ध्यान आदि माध्यमों का स्वस्थ रहने के लिए इस्तेमाल हो रहा है। हर कोई स्वास्थ्य की कीमत को जानते हुए नियमित एक्सरसाइज, मार्निंग वाक आदि के लिए प्रयासरत रहता है। हकीकत यह है कि बदले मौसम के मिजाज, समयाभाव या रोज़ाना से रूटीन से यह सब करने में बोरियत महसूस करने के कारण हम नियमित रूप से इसे करने से कतराने लगते हैं। 
प्रतिदिन सुबह-सुबह 40.45 मिनट वर्कआउट में लगाना एक बड़ा बोझ महसूस होने लगता है। सवाल है कि ऐसा क्या किया जाए जिससे आपका शरीर स्वस्थ रहे और एक्सरसाइज से होने वाली बोरियत भी न हो। इसके लिए जरूरी है कि स्वस्थ रहने के लिए खेल को ही बेहतर एक्सरसाइज मानकर इसे खेला जाए। यदि आप किसी खेल विशेष को खेलने की जानकारी न भी रखते हों तो इसे एक सामाजिक गतिविधि मानकर दूसरों के साथ खेला जा सकता है। जिससे खेल न केवल आपको दूसरे लोगों से जोड़े रहता है बल्कि यह आपके व्यक्तिगत, शारीरिक और मानसिक विकास में भी सहायक साबित हो सकता है। खेल के द्वारा आपकी सभी मांसपेशियां एक साथ सक्रिय हो जाती हैं जिसका आपको जिम जाने की बजाय ज्यादा लाभ मिलता है। इतना ही नहीं आजकल किसी खेल विशेष को सीखने के लिए आम जनता के प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था विभिन्न कालोनियों के स्पोर्ट्स क्लब में उपलब्ध होती है।
यदि आप भी खेल को अपनी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बनाने जा रहे हैं तो इस बात को जेहन में रखें कि आपका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य कैसा है। जिस खेल को नियमित सीखने या खेलने का विचार आप कर रहे हैं क्या आपका शरीर उस खेल विशेष के लिए अनुकूल है। इस बारे में आप डाक्टर या फिटनेस एक्सपर्ट से विचार विमर्श कर लें। इसके अलावा उस खेल की ट्रेनिंग भी सही विधि से अच्छे प्रशिक्षक से लें ताकि आपके स्वास्थ्य पर सीखने के दौरान कोई गलत असर न पड़े।
एक्सरसाइज के विकल्प के तौर पर आप कई प्रकार के खेलों का चुनाव अपनी रूचि के अनुसार कर सकते हैं। कुछ साल पहले तक गोल्फ  को एक ऐसा खेल माना जाता था कि जिसे सिर्फ  बड़ी उम्र के लोग ही खेलते हैं और उसके शारीरिक लाभ को नजरअंदाज कर दिया जाता था। हकीकत में ऐसा नहीं है। आजकल गोल्फ  फिट और एक्टिव रहने के नजरिए से लोगों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल कर रहा है। गोल्फ ऐसे लोगों के लिए बेहद उपयुक्त खेल है जो हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करते हैं इस खेल से शरीर की मांसपेशियों पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता। यदि नियमित रूप से गोल्फ  खेला जाए तो शरीर में स्टेमना बनता है और चूंकि यह इसके खेलने के लिए काफी बड़े स्थान की जरूरत होती है तो इससे साफ  हवा मिलती है। किसी भी खेल को खेलने की शुरूआत करने से पहले शरीर को वार्म अप करके पहले तैयार करके ही खेलना चाहिए। यदि खेल के दौरान आपको किसी प्रकार का दर्द महसूस होता है तो खेल की गति मंद कर देनी चाहिए और दर्द यदि लगातार बना रहता है तो अपने फैमिली डाक्टर से इस विषय में सलाह करना चाहिए। गोल्फ  के अतिरिक्त टेबल टैनिस और लॉन टैनिस जैसे खेल भी खेले जा सकते हैं। बैडमिंटन भी एक्सरसाइज के नजरिए से एक बढ़िया खेल है। जिससे न केवल हड्डियों को मजबूती मिलती है बल्कि इससे हमारे स्वास्थ्य को और भी कई फायदे होते हैं। टैनिसके द्वारा आपका न सिर्फ  स्टैमना बढ़ता है बल्किए इससे शरीर लचीला बनता है और मजबूत होता है। 
टैनिसखेलने के दौरान हाथों, बाजू के कोर्ट में निरंतर गतिशील होने से शरीर की मांसपेशियों का पर्याप्त व्यायाम हो जाता है। टैनिसके रैकट से हाथों का संतुलन बनाए रखने के लिए शरीर की मजबूती आवश्यक होती है। जिससे मांसपेशियां पुष्ट होती हैं और दिमाग की एकाग्रता बढ़ती है। इसे शरीर की आयु के अनुसार होने वाला हड्डियों का क्षय रोकने में काफी मदद मिलती है। इससे मेटाबोलिज्म का स्तर बढ़ता है। कमजोर मांस पेशियों को मजबूती मिलती है। इस खेल द्वारा आपको नई ताजगी और शक्ति का एहसास होता है। मांसपेशियों के लगातार सक्रिय रहने से जोड़ों के दर्दों से भी बचाव हो पाना संभव होता है। टैनिस की तरह ही बैडमिंटन का खेल भी शरीर को चुस्ती प्रदान करता है। इस खेल को सीखने के लिए आपको किसी विशेष प्रकार के प्रशिक्षण की जरूरत नहीं होती बस आपके साथ खेलने वाला एक साथी मिलना चाहिए। बैडमिंटन खेलने के दौरान मांसपेशियों से लगातार गति से आपकी एक्सरसाइज करने का उद्देश्य तो पूरा होता ही है साथ ही शरीर में चुस्ती और फुर्ती भी बनी रहती है। जिन खेलों में खेलने के लिए रैकट का इस्तेमाल किया जाता है इससे दिमाग की भी कसरत हो जाती है। इससे होने वाली शारीरिक गतिविधियों से शरीर की मांसपेशियों के होने वाले फैलाव और सिकुड़न से हडिड्यों के जोड़ों में मजबूती आती है। लेकिन इन तामाम खेलों को खेलने का हृदय रोगियों पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकता है।