आज भी आकर्षित करते हैं कोडापल्ली खिलौने


लकड़ी से बने खिलौने अब बच्चों की दुनिया से गायब हो रहे हैं, लेकिन ये लम्बे समय से हमारी परम्परा का हिस्सा रहे हैं। ये देखने में तो आकर्षक होते ही हैं साथ ही ये ग्रामीण जीवन से भी रू-ब-रू करवाते हैं। आज इनके बारे में जानते हैं :-
कोडापल्ली खिलौने
कोई लकड़ी का टुकड़ा देकर उसका उपयोग करने को कहे तो आप क्या कर सकते हो? या तो पेपर वेट बनाओगे या अपने दरवाजे को हवा से बंद न हो तो ब्रेकर की तरह उपयोग करोगे बस। लेकिन कोडापल्ली कारीगरी को वही टुकड़ा दे देखो वे अपने हाथ के जादू से किस तरह उसमें रंग भर आपके लिए खूबसूरत खिलौना बना देंगे। भारत में कई ऐसे क्षेत्र हैं जो खिलौने बनाने के लिए शामिल हैं। दक्षिणी राज्यों में आंध्र प्रदेश के कोडापल्ली निर्मल एट्टी कोपक्का और तिरुपति लकड़ी के खिलौने के लिए जाने जाते हैं। आंध्र प्रदेश स्थित विजयवाड़ा जिले में बने लकड़ी के कोडापल्ली खिलौने काफी प्रसिद्ध हैं। जो कारीगर इस पेशे में हैं उनकी पीढ़ी दर पीढ़ी की आजीविका इसी कला पर निर्भर है। कोडापल्ली आंध्र प्रदेश का एक औद्योगिक कस्बा है जिसकी पहचान इन खलौनों के कारण है।
कैसे बनते हैं ये
इन खिलौनों को बनाना बच्चों का खेल नहीं। इनकी डिज़ायनिंग में काफी लम्बा समय लगता है। इस क्षेत्र के दस्तकार हल्की लकड़ी जिसे पकी लकड़ी के नाम से जाना जाता है, खिलौने इसी से बनते हैं। यह काफी मुलायम होती है और आसानी से जुड़ भी जाती है। सबसे पहले लकड़ी को इतना गर्म किया जाता है कि इसमें नमी न रहे। फिर जो खिलौने की आकृति बनाई जाती है उसके अलग-अलग हिस्से बनाए जाते हैं। इन हिस्सों को जोड़ दिया जाता है फिर इन पर प्राकृतिक और एनामिल रंग लगा दिए जाते हैं फिर पतले हल्के ब्रश से इन पर पेंटिंग बनाई जाती है। इन चित्रकारियों में पशु-पक्षी, ग्राम जीवन, देवी-देवताओं तथा सैनिकों आदि की आकृतियां बनाई जाती हैं। ये खिलौने देखने में बहुत खूबसूरत लगते हैं।
खिलौने की थीम
इन खिलौने को जानवरों और ग्रामीण जीवन को देखते हुए डिज़ायन किया जाता है। हंस, मोर और तोता इसके लिए लोकप्रिय थीम है। कुछ ज़िंदगी के प्रसंग को भी खिलौना बनाने में थीम की तरह उपयोग किया जाता है। जैसे कुएं से पानी खींचती महिला, सपेरे, हाथी के साथ महावत आदि। इसके साथ ही भगवान को भी आकार दिया जाता है जैसे कृष्ण बांसुरी बजाते और गायों को चराते हुए दिखाते हैं।
बहुत कुछ सिखाते हैं
ये खूबसूरत कोडापल्ली खिलौने ज़िंदगी में सीख तो देते ही हैं। साथ ही रंग और खुशी भी भरते हैं। ये ग्रामीण ज़िंदगी से रू-ब-रू कराते हैं। आज बॉबी डॉल ने भले ही पुराने खिलौनों की जगह ले ली है। लेकिन इन पुराने कोडापल्ली खिलौनों की यादें सबके दिल में बसी हैं।
कितने पुराने खिलौने
भारत में 5000 वर्ष पुराने हड़प्पा संस्कृति के खिलौने अब तक मौजूद हैं। ये खिलौने प्राकृतिक चीजों से जैसे वत्ते लकड़ी और पत्थरों से बने हैं। और तो और ये प्राचीन खिलौने बाद में हाथ से बनाए गए खिलौनों से काफी मेल खाते हैं। 

जी.के. खत्री